सिद्धार्थनगर। जिला न्यायालय परिसर में गुरुवार को बम की सूचना से आधे घंटे तक हड़कंप मच रहा। मौके पर पहुंची पुलिस की जांच मेें बम बताई जा रही वस्तु चाइनीज घड़ी निकली। किसी शरारती तत्व ने इसे परिसर में एक बाइक की सीट पर रख दिया था, जिसे बाद में सूखे पेड़ पर टांग दिया गया। बैट्री निकालते ही घड़ी बंद हो गई तब जाकर पुलिस ने राहत की सांस ली। बाद में पुलिस ने परिसर में तलाशी अभियान चलाया।
न्यायालय परिसर में दोपहर करीब साढ़े 12 बजे अधिवक्ताओं की नजर बार सभागार के रास्ते में खड़ी एक सफेद रंग की बाइक पर पड़ी। उसकी सीट पर करीब छह इंच लंबी सफेद रंग की कोई इलेक्ट्रानिक वस्तु रखी थी, जिससे टिक-टिक की आवाज आ रही थी। तत्काल सतर्कता दिखाते हुए एक अधिवक्ता ने उसे बाइक से उठाकर थोड़ी दूर स्थित सूखे शीशम के पेड़ पर टांग दिया और न्यायिक अधिकारियों व पुलिस को सूचना दी। बम की आशंका से परिसर में हड़कंप मच गया।
आनन-फानन में सीओ सदर डीके सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। पेड़ पर टंगी वस्तु को नीचे उतारा तो वह घड़ी निकली। एक तरफ छोटी सी स्क्रीन पर टाइम दिख रहा था। तय समय से करीब 20 मिनट पीछे चल रही घड़ी बैटरी निकालते ही बंद हो गई। इसके बाद पुलिस और परिसर में मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली। कुछ देर में एएसपी अरविंद मिश्र भी मौके पर पहुंचे। पुलिस की स्थानीय बम निरोधक टीम ने पूरे न्यायालय परिसर में तलाशी अभियान चलाया। वहां सब कुछ सामान्य मिला। एएसपी ने बताया कि न्यायालय परिसर से बरामद वस्तु घड़ी थी। उसकी अलग बनावट के कारण बम का शक हुआ था। अफवाह फैलने से पहले ही पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाल लिया। किसी शरारती तत्व ने वादकारी की बाइक पर इसे रखा था।
ऐसी थी बरामद घड़ी
न्यायालय परिसर से बरामद घड़ी करीब छह इंच लंबी है। इसमें एक तरफ छोटी सी स्क्रीन है। किनारे की तरफ टाइम जोन की सेटिंग के लिए विभिन्न देशों के नाम अंकित हैं। पिछले हिस्से में बैट्री डिवाइस है, जिसमें एक साथ चपटे आकार वाली तीन बैटरियां लगती हैं। इसके साथ एक डोरी लगी हुई है, जिससे घड़ी को कहीं टांगा जा सकता है।
पुलिस पहुंची तो सकते में आए लोग
न्यायालय परिसर में बम की सूचना पर दोपहर साढ़े 12 बजे पुलिस पहुंची। तब तक चंद लोगों को इसकी जानकारी थी। अधिवक्ता-वादकारी सामान्य रूप से अपने कामों में लगे हुए थे। सीओ के नेतृत्व में अचानक फोर्स पहुंचने पर हर कोई सकते में आ गया। एक-दूसरे से पूछताछ शुरू की, तब उन्हें बम वाली बात की जानकारी हुई। अधिवक्ता हरिहर पाठक, कन्हैया पांडेय, अंबरीश आदि ने बताया कि सतर्कता से अफवाह ने जोर नहीं पकड़ा, वरना भगदड़ की स्थिति उत्पन्न हो सकती थी।
नेपाल की खुली सीमा के कारण संवेदनशील है क्षेत्र
जिले की 68 किमी. लंबी सीमा नेपाल से लगी हुई है। खुली सीमा होने के कारण लोग बेरोकटोक आते-जाते रहते हैं। कई आतंकी और शातिर अपराधी इस सीमा से पकड़े जा चुके हैं। तस्करों, अराजक तत्वों की सक्रियता के मामले अक्सर सामने आते रहे हैं। लिहाजा यह सीमा बेहद संवेदनशील है। सुरक्षा एजेंसियां भी लगातार सतर्क रहती हैं।
एक साल पहले भी फैली थी अफवाह
- बम होने की अफवाह फैलने का यह पहला मामला नहीं है। करीब 11 माह पहले 4 मई 2017 को भी नगर के सिविल लाइन इलाके में गैस एजेंसी के संचालक व सिद्धार्थ महाविद्यालय के प्रबंधक प्रेमप्रकाश श्रीवास्तव के घर में बम होने की सूचना से खलबली मच गई थी। नगर के व्यस्त इलाके में बम की अफवाह ने करीब पांच घंटे तक लोगों को दहशत में रखा। देर शाम गोरखपुर से आए बम निरोधक दस्ते ने छानबीन की तो संदिग्ध वस्तु टेप में बंधी प्लास्टिक की पाइप निकली, जिसके साथ घड़ी लगाकर बम जैसा रूप देने का प्रयास किया गया था। मौके से एक धमकी भरा खत भी पाया गया था, जिसमें 24 लाख रुपये की डिमांड की गई थी। करीब एक पखवाड़े में ही पुलिस ने घटना का पर्दाफाश करते हुए आरोपी छात्र को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
जल्द लगेंगे सीसीटीवी कैमरे
- जिला न्यायालय के प्रशासनिक अधिकारी अरुण कुमार द्विवेदी के मुताबिक परिसर में सुरक्षा के मद्देेनजर जल्द ही सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने हैं। परिसर के हर कोने की कैमरे से निगरानी की योजना तैयार की जा रही है। मेटल डिटेक्टर व अन्य सुरक्षा इंतजामों का भी प्रस्ताव है। पुलिस से संपर्क कर जल्द ही इसे चालू कराया जाएगा।