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Siddharthnagar News: मरीज माफियाओं पर कसेगा शिकंजा, होगी कार्रवाई

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- मेडिकल कॉलेज और सीएचसी, पीएचसी की जांच के लिए गठित हो रही टीम
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- दवा से लेकर जांच तक में होता है कमीशन का खेल

- महकमे में गठजोड़, डॉक्टर के केबिन से दवा और जांच का होता है सौदा

संवाद न्यूज एजेंसी

सिद्धार्थनगर। मेडिकल कॉलेज और सीएचसी, पीएचसी चल रही मरीज माफिया और महकमे का गठजोड़ तोडने के लिए स्पेशल जांच टीम गठित होने जा रही है। टीम दो स्तर पर गठित होगी। एक मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य और दूसरा सीएमओ के स्तर काम करेगी। इसमें कुछ लोग ऐसे शामिल किए जाएंगे जो पर्दे के पीछे से रिपोर्टिंग करेंगे और टीम को अवगत कराएंगें। इसके बाद कार्रवाई की जाएगी।
अस्पताल में मरीजों की सौदेबाजी के बढ़ते हुए मामले को देखते हुए विधान परिषद के सभापति की समिति ने इसका संज्ञान लिया था। इसके बाद शासन की ओर से यह निर्देश दिए गए कि टीम गठित करके जांच की जाए और पकड़े जाने वालों पर केस दर्ज कराया जाए, जिससे मरीजों को शोषण बंद हो सके।
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सरकार मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने का दावा कर रही है। उनके लिए योजनाएं चल रही हैं, जिससे मरीजों को सहूलियत और लाभ मिल सके, लेकिन सिस्टम में गठजोड़ करके घुस चुके मरीज माफिया डॉक्टरों से केबिन से बैठकर जांच और बाहर की दवा लिखवाते हैं। इसमें दोनों का कमीशन तय है। दलालों का नेटवर्क चिकित्सक के केबिन से शुरू होकर पूरे अस्पताल में फैला हुआ है। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में मरीज माफियाओं का खेल जगजाहिर है। यहां पड़ताल में मरीज माफियाओं का काला कारोबार सामने आ चुका है। कमोबेश यही हाल सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर चलता है। यहां तो खुलेआम दवाएं बाहर से लिखी जाती हैं।
अस्पताल गेट के आसपास मेडिकल स्टोर और जांच लैब देखे जा सकते हैं। अस्पतालों में सुविधा मुहैया कराने के बजाए मरीज बिक रहे हैं। इस मामले को विधान परिषद के सभापति की समिति ने इसे संज्ञान में लिया था। इसके बाद शासन की ओर से दिशा- निर्देश दिया गया है कि मेडिकल कॉलेज स्तर पर टीम गठित की जाए। इसके साथ सीएचसी और पीएचसी में होने वाली दलाली को रोकने के लिए सीएमओ स्तर पर टीम का गठन किया जाए। बाहर की दवा और जांच लिखने वालों के बारे में जानकारी ली जाए, इसके बाद उनके खिलाफ केस दर्ज कराया जाए।

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इन बिंदुओं पर काम करेगी टीम

मेडिकल कॉलेज और सीएमओ स्तर पर दो अलग-अलग टीम बनेगी। इसमें तीन-तीन सदस्यीय टीम रहेगी। वह अस्पताल में काबिज होने वाले बाहरी चेहरों को चिह्नित करेगी। अस्पताल से अगर कोई मरीज रेफर होता है तो क्यों हुआ, क्या कारण रहा जो रेफर करना पड़ा। रेफर होने के बाद गया कहां, क्या किसी स्टाफ के बताए हुए अस्पताल में गया है। इसके साथ ही औचक निरीक्षण में अगर कोई बाहर से दवा लेता है और जांच कराता है तो उसे मरीज से भी जानकारी ली जाएगी। अगर दबाव या किसी के प्रभाव में दवा और जांच के लिए भेजने वाले को नाम लेता है तो कार्रवाई की जाएगी। टीम गठित होने के बाद पोस्टर लगवाएगी, जिसमें जांच करने वाले अधिकारी का नाम और नंबर रहेगा। अगर किसी को शिकायत करना होगा तो उसी नंबर पर शिकायत कर सकेगा।

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एंबुलेंस माफिया उठा लेते हैं मरीज, पड़ चुकी है तहरीर

माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी से दलाल मरीजों को बरगला कर उन्हें निजी अस्पताल ले जाते हैं। हाल ही में एक डॉक्टर का ऑडियो वायरल हुआ था, जिसमें वह स्पष्ट कर रहा है कि मरीज के आगे हमारा नाम जरूर लिखवा देना। इसके बाद उसे हटा दिया गया है। इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि मरीज माफिया और विभागीय लोगों की गठजोड़ कितनी तगड़ी है।

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निजी लैब से बुलाकर करा रहा था जांच

माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में ही छह माह पहले एक मामला आया था। बाहर से लैब वालों को बुलाकर एक चिकित्सक पर जांच के नाम पर रुपये लेने का आरोप लगा था, चिकित्सक के खिलाफ मरीज के परिजनों ने हंगामा किया था।

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अल्ट्रासाउंड जांच के लिए बाहर भेजने की बात आ चुकी है सामने

मेडिकल कॉलेज से गर्भवती महिलाओं और पेट के रोगियों की अल्ट्रासाउंड जांच शहर के एक निजी केंद्र पर भेजने का मामला कई बार सामने आ चुका है, जबकि मेडिकल कॉलेज में अल्ट्रासाउंड और खून से जुड़ी सभी प्रकार की जांच होती है, लेकिन कमीशन के खेल में मरीजों का सौदा होता है।

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ब्लड बैंक में खून बेचने का खेल

खून माफिया भी सामने आ चुके हैं। मरीजों से रकम लेकर ब्लड बेचते हैं। कई बार ऐसा मामला भी आया है कि मरीज कहीं और भर्ती और यहां के पर्चे पर ब्लड लेकर उसका भी सौदा कर लेते हैं। कहा जाए तो हर स्तर पर मरीजोंं को शोषण जारी है। अगर टीम गठित होगी और जांच सही से होगी तो बाहरी के साथ ही विभागीय चेहरे जद में आएंगे।

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बोले जिम्मेदार

शासन से दलालों के नेवटर्क की जांच करते हुए कार्रवाई करने का दिशा- निर्देश मिला है। टीम का गठन किया जाएगा जो अस्पतालों पर जाकर जांच करेगी और पकड़े जाने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।
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-डॉ. डीके चौधरी, प्रभारी सीएमओ

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दलालों पर कार्रवाई करने के संबंध में दिशा- निर्देश हुआ है। जांच करने के लिए टीम का गठन किया जाएगा। इसके बाद टीम जांच करेगी। पकड़े जाने वालों पर केस दर्ज करवाया जाएगा।

-डॉ. एके झा, प्राचार्य माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल
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