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बांनगगा की कटान से खतरे में नौडिहवां टोले का अस्तित्व

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बानगंगा की कटान से खतरे में नौडिहवां टोला
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2015 से टोले की तरफ बढ़ रही है कटान, अभी तक नहीं हुआ इंतजाम
दो घर पहले से नदी में हो चुके हैं विलीन, चार घर खतरे के निशान पर
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। बानगंगा नदी के किनारे बसे बसाहिया ग्राम पंचायत के नौडिहवा टोले का अस्तित्व खतरे में है। नदी की कटान लगातार टोले की तरफ बढ़ने से किनारे बसे लोगों की नींद उड़ी हुई है। 2015 से ही नदी की कटान गांव की तरफ हो रहा है मगर अभी प्रशासन ने इसके बचाव के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। यदि कटान की गति इसी तरह से रही तो कई घर नदी में विलीन हो जाएंगे। नदी के किनारे बसे राजमन यादव ने बताया कि पिछले चार वर्षों नदी की कटान टोले की तरफ हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि उच्चाधिकारियों को कई बार पत्र देकर समस्या का समाधान कराने की मांग की गई लेकिन इधर कोई ध्यान नहीं दिया गया। प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई नहीं की, इसका नतीजा यह हुआ कि दो घर कटान में समा चुके हैं जबकि चार मकान कटान के मुहाने तक पहुंच चुके हैं। गूदे यादव का कहना था कि बाढ़ के समय में कई जनप्रतिनिधि आते हैं लेकिन उनसे भी आश्वासन के सिवा अभी तक कुछ नहीं मिला। अब तो प्रशासन और नेताओं से भरोसा उठ गया है। गांव के के गौरी का कहना था कि पुल के उत्तर दिशा में तेजी से कटान हो रहा है यदि समय से कोई प्रबंध नहीं किया गया तो टोले का अस्तित्व खत्म हो जाएगा। सोमराज ने बताया कि नदी की कटान उनके घर तक पहुंच चुकी है, यदि कोई उपाय नहीं किया गया तो एक दो दिन में उनका घर भी पानी में समा जाएगा। बाढ़ को देखते हुए उनके परिवार रात भर जाग कर गुजार रहा है। तहसीलदार राजेश अग्रवाल ने बताया कि नौडिहवा गांव में कटान की सूचना मिली है, वहां का निरीक्षण करा राहत और बचाव के उपाय कराए जाएंगे।
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दो घर पहले से नदी में हो चुके हैं विलीन
प्रधान प्रतिनिधि राजेंद्र यादव ने बताया कि 2015 से हो रहे कटान में टोले के दो घर नदी में समा गए हैं। जबकि चार घर खतरे के निशान पर हैं। इसके लिए कई बार उच्चाधिकारियों को पत्र के माध्यम से अवगत कराया गया मगर अभी तक कोई समाधान नहीं हो सका। ग्राम पंचायत स्तर से बांस बल्ली के सहारे कटान रोकने का प्रयास किया गया था मगर मगर कटान की रफ्तार में वह भी नहीं टिका।
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