इमरजेंसी वार्ड के बगल बना दिया कोरोना जांच सेंटर
जाने आने जाने में गंभीर मरीज भी हो सकते हैं कोरोना के शिकार
हर दिन लगती है सैंपल देने वाले सैकड़ों लोगों की भीड़
श्याम सुंदर तिवारी
सिद्धार्थनगर। कोरोना का संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। चिकित्सकों की दलील है कि बचाव से ही संक्रमण की रोकथाम हो सकती है। यह बीमारी छींकने, खांसने और संपर्क में आने से फैल रही है, बावजूद इसके जिला अस्पताल के उस स्थान पर कोरोना ट्रू-नॉट जांच केंद्र बना दिया गया जहां हर वक्त गंभीर मरीज आते हैं। इमरजेंसी वार्ड के ठीक बगल में कोरोना सैंपल केंद्र बना दिया गया। इमरजेंसी वार्ड में आने वाले गंभीर रोगियों की जान कोरोना संक्रमित या संदिग्धों के संपर्क में आने से जोखिम में पड़ सकती है। अगर व्यवस्था में तब्दीली नहीं की गई तो इस जगह से संक्रमण फैलने की संभावनाओं से इन्कार नहीं किया जा सकता।
अभी तक लाइलाज माना जा रहा कोरोना वायरस तेजी से फैल रहा है। चिकित्सक इससे बचने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग, फेसमास्क, सैनिटाइजर और ग्लव्स पहनने की सलाह देते हैं। लोगों को भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से परहेज करने को जागरूक किया जा रहा है। बुखार, खांसी, सर्दी जैसी शिकायत होने पर खुद को क्वारंटीन करने और चिकित्सकों की सलाह लेने का परामर्श दिया जा रहा है। सरकार भी बीमारी को रोकने के तमाम प्रयास कर रही है। मगर जिले के स्वास्थ्य महकमे के जिम्मेदार इससे अनजान नजर आ रहे हैं। कारण जिला अस्पताल के सबसे भीड़भाड़ वाले स्थान इमरजेंसी वार्ड के बरामदे के कमरे में कोरोना ट्रू-नॉट सैंपल केंद्र बना दिया गया है। यहां लोग जांच कराने के लिए आते हैं। साथ ही इमरजेंसी में भी गंभीर बीमारी से ग्रसित मरीज आते हैं। अब अगर इमरजेंसी में आने वाले मरीज संक्रमित हैं तो अन्य लोग कोरोना के गिरफ्त में आ सकते हैं। वहीं अगर जांच कराने के लिए आने वाले व्यक्ति संक्रमित है तो पहले से दूसरी बीमारी का शिकार व्यक्ति एक घातक बीमारी का न्यौता दे रहा है। सीएमओ डॉ. इंद्रविजय विश्वकर्मा ने बताया कि इमरजेंसी वार्ड में आने वाले मरीजों का ट्रू-नाट जांच के लिए वहां मशीन लगी है। वहीं सीएमएस डॉ. संजीव कुमार वर्मा ने बताया कि ट्रू-नॉट जांच केंद्र उनके आने से पहले ही स्थापित की गई थी। लोगों को खुद जागरूक होने की जरूरत है, तभी कोरोना के संक्रमण से मुक्ति मिलेगी।
इमरजेंसी में आते हैं गंभीर मरीज
चिकित्सकों का मानना है कि कोरोना का खतरा सबसे अधिक डायबिटीज, ब्लडप्रेशर, हॉर्ट, किडनी, लीवर जैसी गंभीर बीमारी से पहले से शिकार लोगों पर तेजी से असर करता है। ऐसे में इमरजेंसी वार्ड में आने वाले मरीजों में इनकी संख्या कम नहीं होगी। इसलिए इन्हें संक्रमण का खतरा होगा।
सामान्य दिनों में आते हैं 30 से अधिक मरीज
इमरजेंसी वार्ड में सामान्य दिनों में बुखार, हाई ब्लडप्रेशर, दुर्घटना सहित अन्य बीमारी से ग्रसित होने वाले 30 से 40 तक मरीज पहुंचते हैं। वहीं बदलते मौसम में मरीजों की संख्या 50 से अधिक तक पहुंच जाती है।