मुख्य चिकित्सा अधिकारी के रवैये पर बिफरे कर्मचारियों ने गुरुवार को कार्यालय में जमकर हंगामा मचाया। सीएमओ पर उत्पीड़न और अभद्रता का आरोप लगाते हुए कर्मचारियों ने कामकाज ठप कर दिया और परिसर में धरना देकर नारे लगाए। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक सीएमओ का ट्रांसफर नहीं होता, वह काम पर नहीं लौटेंगे।
स्वास्थ्य कर्मचारियों के इस आंदोलन में राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद, शिक्षक संघ सहित अन्य संगठनों ने भी समर्थन की घोषणा की है। शुक्रवार से आंदोलन को पूरे जिले मेें शुरू करने का ऐलान किया है।
यूपी मेडिकल एंड पब्लिक हेल्थ मिनिस्ट्रियल एसोसिएशन के बैनर तले लामबंद कर्मचारियों का आरोप है कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी लगातार उत्पीड़नात्मक कार्रवाई कर रही हैं। पिछले 4 माह से वेतन बिल पर दस्तखत नहीं किए हैं। इससे वेतन भुगतान लंबित है।
अन्य तमाम जरूरी फाइलें भी लंबित पड़ी हुई हैं। कर्मचारी जब फाइल लेकर जाते हैं तो बाद में आने की कह उसे टाल दिया जाता है। लगातार टालमटोल से जरूरी फाइलें भी महीनों से अटकी हुई हैं। उच्चाधिकारी पूछताछ करते हैं तो सारा दोष कर्मचारियों पर मढ़ दिया जाता है।
संघ के जिलाध्यक्ष दीपेन्द्र मणि त्रिपाठी ने कहा कि सीएमओ कर्मचारियों से अभद्रता पूर्वक व्यवहार करती हैं। जानबूझकर एक-दूसरे के बीच विवाद उत्पन्न करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे कार्यालय का माहौल खराब हो। लिहाजा ऐसी स्थिति में काम-काज संभव नहीं है।
गुरुवार की दोपहर बाद से हड़ताल पर गए कर्मचारियों के हंगामे की सूचना पर सदर एसओ शिवाकांत मिश्र मौके पर पहुंचे। कर्मचारियों से वार्ता कर समझाने की काफी कोशिश की गई, मगर वह कुछ भी सुनने को तैयार नहीं हुए। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक सीएमओ का निलंबन या तबादला नहीं होता, वह कोई काम नहीं करेंगे।
हड़ताल की सूचना पर राजकीय वाहन चालक संघ, प्रयोगशाला सहायक संघ, उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के पदाधिकारी भी मौके पर पहुंचे और आंदोलन को समर्थन देने की घोषणा की। आंदोलन में अजय कुमार सिंह, अनिल सिंह, वीसी जाटव, घनश्याम, आनन्द श्रीवास्तव, मनोज सिंह, राजेश कुमार, मनीष, संजय, शमप्रीत प्रसाद, डीके सिंह, संजीव कुमार, एसए खान, रणजीत कुमार, वीरेन्द्र कुमार, शिवसागर दुबे, अब्दुल अजीज आदि शामिल रहे। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के जिलाध्यक्ष अनिल सिंह ने कहा कि कर्मचारियों के प्रति सीएमओ का रवैया उचित नहीं है। वेतन बिल लंबित रखने से दिवाली पर भी कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल सका। कर्मचारियों का आंदोलन जायज है। शीघ्र समस्या हल न हुई तो अन्य विभागों के कर्मचारी भी आंदोलन पर जाने को बाध्य होंगे।