सिद्धार्थनगर। जल जीवन मिशन के तहत जिले में पाइपलाइन बिछाने का काम लगभग पूरा होने के बावजूद सभी गांवों में नियमित जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। जिला डैशबोर्ड के आंकड़ों के अनुसार 2,080 गांव मिशन के दायरे में हैं।
इनमें 1,232 गांवों में परियोजना की कमीशनिंग दर्ज है। यानी वहां जलापूर्ति चालू की जा चुकी है। इसके मुकाबले नियमित जलापूर्ति वाले गांवों की संख्या 928 है। इस तरह कमीशनिंग वाले 304 गांवों में नियमित जलापूर्ति दर्ज नहीं है।
मिशन के तहत जिले में 7,865 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाने का लक्ष्य है। इसके मुकाबले 7,843 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाने की प्रगति दर्ज है। यह लक्ष्य का 99.72 प्रतिशत है। वहीं, नियमित जलापूर्ति 2,080 में से 928 गांवों में दर्ज है, जो 44.62 प्रतिशत है। इससे पाइपलाइन बिछाने और नियमित जलापूर्ति शुरू होने के बीच का अंतर सामने आता है।
घरेलू नल कनेक्शन के मामले में भी काम काफी आगे बढ़ा है। 4.03 लाख के लक्ष्य के मुकाबले 3.51 लाख परिवारों को एफएचटीसी यानी घरेलू नल कनेक्शन दिए जाने की प्रगति दर्ज है। यह लक्ष्य का 87.08 प्रतिशत है। हालांकि कनेक्शन होने के बाद भी हर गांव में नियमित रूप से पानी पहुंचना अलग प्रक्रिया है। डैशबोर्ड के अनुसार 2,080 गांवों में 1,586 अभी निर्माणाधीन श्रेणी में दर्ज हैं। 278 गांव ट्रायल रन में हैं जबकि 218 गांव ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस श्रेणी में हैं। निर्माणाधीन गांवों में सार्वजनिक सुविधा के लिए आंशिक जलापूर्ति और ट्रायल रन वाले गांवों में यथासंभव पानी देने का उल्लेख है लेकिन आंशिक या ट्रायल आपूर्ति को नियमित जलापूर्ति नहीं माना जा सकता।
ऐसे में मिशन की वास्तविक स्थिति का आकलन पाइपलाइन और कनेक्शन के साथ नियमित जलापूर्ति के आंकड़े से भी करना होगा।