सिद्धार्थनगर। महात्मा बुद्ध की क्रीड़ास्थली कपिलवस्तु पर स्थापित सिद्धार्थ यूनिवर्सिटी को बौद्ध अनुयाई देशों से जोड़ने के लिए यहां भाषा विज्ञान के तहत चीनी, सिंहली, नेपाली, तमिल सहित अन्य विदेशी भाषाओं की पढ़ाई शुरू करने की तैयारी है। भाषा विज्ञान के अलावा ललित कला व संगीत, दर्शन, कृषि विज्ञान संकाय के साथ बुद्ध अध्ययन केंद्र की स्थापना की कवायद की जा रही है। गुरुवार को दीक्षांत समारोह के दौरान कुलपति प्रो.रजनीकांत पांडेय ने यूनिवर्सिटी की इस भावी योजनाओं को साझा किया। कहा कि कोशिश है कि नए सत्र से ही नए पाठ्यक्रम शुरू करा दिए जाएं।
अपने संबोधन में कुलपति ने कहा कि यह 21वीं सदी का विश्वविद्यालय है। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर होने के चलते इसकी विशेष महत्ता है। भारत-नेपाल के संबंधों को प्रगाढ़ करने में सेतु की भूमिका निभाने को तैयार है तो ‘दीपो भव’ की अभिव्यक्ति देने के लिए कृत संकल्पित भी। अल्प संसाधनों और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद यूनिवर्सिटी ने कई उपलब्धियां हासिल की हैं।
कैशलेस प्रक्रिया से जुड़ने वाला प्रदेश का पहला विश्वविद्यालय है तो डिजिटल इंडिया को अपनाने में भी अग्रणी है। जल्द ही शिक्षकों के रिक्त पदों पर नियुक्ति के साथ नए पाठ्यक्रम की शुरुआत होगी जिससे यूनिवर्सिटी अपनी महत्ता को सार्थक कर सके।