हार्ड और साफ्ट ब्लाक के चक्कर में नौनिहालों का भविष्य अंधकार में पड़ गया
है। साफ्ट ब्लाक के स्कूलों में शिक्षक नहीं है। शिक्षकों के अभाव में
स्कूलों पर ताला लटक रहा है।
अकेले बर्डपुर ब्लाक में ही 20 स्कूल बंद हैं।
बच्चों की पढ़ाई ठप है। आधा सत्र बीतने को है, बावजूद स्कूलों का ताला न
खुलने से बच्चों की पढ़ाई पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। बेहतर शिक्षा का
दावा करने वाले जिम्मेदारों के पास इतने संसाधन भी नहीं है कि इन स्कूलों
को चालू कराकर बच्चों के भविष्य को संवार सकें।
बर्डपुर ब्लाक में 100 प्राथमिक और 41 जूनियर हाईस्कूल हैं। सर्व शिक्षा
अभियान के तहत इन स्कूलों में बच्चों का नामांकन तो कर लिया गया, मगर
उन्हें पढ़ाने के लिए शिक्षक की व्यवस्था कर पाने में विभाग नाकाम है। आलम
यह है कि शिक्षक के अभाव में स्कूल बंद हो गए हैं।
विकासखंड 13 प्राथमिक
विद्यालय ऐसे हैं, जिनमें ताला लगा हुआ है। बंद जूनियर विद्यालयों की
संख्या सात है। इनमें ज्यादातर स्कूल सत्र के आरंभ से ही बंद हैं। वहीं कई
स्कूलों में कुछ माह तक पढ़ाई हुई, फिर शिक्षक ट्रांसफर कर अन्यत्र भेज दिए
गए। शिक्षक के अभाव में इन गांवों के बच्चों की प्राथमिक शिक्षा भगवान
भरोसे है।
पढ़ाई-लिखाई छोड़कर बच्चे घर बैठे हुए हैं। अभिभावक शिवलाल,
वीरेन्द्र कुमार, दीपक आदि का कहना है कि एक तरफ शत-प्रतिशत साक्षरता की
बात हो रही है तो दूसरी तरफ शिक्षक के अभाव में स्कूल बंद हो रहा है।
प्राइमरी स्कूल भी नहीं रहेंगे तो गरीब परिवारों के बच्चे पढने के लिए कहां
जाएं। बर्डपुर के खंड शिक्षा अधिकारी विजय गुप्ता ने बताया कि साफ्ट ब्लाक
होने के कारण यहां पुरुष शिक्षकों की तैनाती नहीं हो सकती। महिला शिक्षकों
के भरोसे स्कूल चल रहे हैं। बंद स्कूलों को चलाने के लिए शिक्षकों की
नियुक्ति सम्बन्धी पत्र उच्चाधिकारियों को भेजा गया है।