नहाय खाय के साथ छठ पूजा शुरू, खरना कल
लोक आस्था के पर्व पर सज गए हैं घाट
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। लोक आस्था के महापर्व छठ का चार दिवसीय अनुष्ठान गुरुवार को नहाय-खाय के साथ शुरू हो गया है। व्रतियों ने सुबह गंगा स्नान करने के बाद नहाय-खाय का प्रसाद, पवित्र तरीके से कद्दू की सब्जी, चने की दाल और चावल बनाया। व्रती के प्रसाद का सेवन करने के घर के लोगों ने वही प्रसाद ग्रहण किया। कुछ लोगों ने नदियों के तट पर ही प्रसाद बनाया तो कुछ लोगों ने घर में नहाय-खाय की पूजा की। मुख्यालय समेत जनपद के प्रमुख कस्बों में स्थित छठ घाटों पर मेले सा नजारा देखने को मिलेगा। व्रती के साथ पूरा परिवार छठ घाट पर चार दिनों तक साथ रहेगा। भक्तिभाव का ऐसा संगम विरले ही देखने को मिलता है।
नहाय-खाय के बाद खरना कल
खरना के दिन कद्दू-भात के प्रसाद का महत्व होता है। पर्व के दूसरे दिन व्रती सुबह से निर्जला उपवास करेंगी। दिनभर घर या नदी किनारे व्रती गंगाजल से साफ-सफाई करेंगी। शाम में मिट्टी के चूल्हे में आम की लकड़ी जलाकर पीतल या मिट्टी के बरतन में गुड़, चावल और दूध से खीर बनाएंगी। फिर गंगाजल से धुले गेहूं को पिसवाकर रखे आटे से पूड़ी या रोटी बनाएंगी। शाम होते ही छठी मइया की पूजा कर प्रसाद ग्रहण करेंगी। तत्पश्चात घर के बाकी लोग प्रसाद ग्रहण करेंगे।
छठ घाटों पर व्यवस्था चाक-चौबंद
छठ को लेकर जिला मुख्यालय समेत प्रमुख कस्बों के छठ घाटों पर व्यवस्था चाक चौबंद कर दिया गया है। गुरुवार को भी बाजार में भी चहल-पहल दिखाई पड़ी। व्रती अपने परिवार के साथ बाजार में पूजन सामग्री की खरीदारी करते नजर आए। नहाय-खाय का प्रसाद बनाने के लिए घाटों से गंगाजल लेकर घर जाते लोग भी दिखे। पंडित राम मिलन त्रिपाठी ने कहा कि सौम्य एवं स्थिर योग में चार दिवसीय अनुष्ठान संपन्न होगा।
चार दिवसीय अनुष्ठान के मौके पर ग्रह-गोचरों के शुभ संयोग
पंडित राम मिलन ने कहा कि कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को रवियोग में गुरुवार को नहाय-खाय के साथ छठ महापर्व शुरू हो गया है। शुक्रवार को व्रती खरना का प्रसाद ग्रहण कर 36 घंटे का निर्जला व्रत कर तीन नवंबर को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देेने के साथ व्रत का समापन करेंगी। शनिवार दो नवंबर को व्रती सायंकालीन अर्घ्य त्रिपुष्कर योग में देंगी। तीन नवंबर रविवार को उदीयमान सूर्य को सर्वार्थ-सिद्धि योग में भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन करेंगी। पुराणों के हवाले से बताया कि सूर्य षष्ठी का व्रत आरोग्यता, सौभाग्य व संतान के लिए किया जाता है। स्कंद पुराण के अनुसार राजा प्रियव्रत ने भी यह व्रत किया था। राजा प्रियव्रत कुष्ठ रोग से प्रभावित थे। भगवान सूर्य को प्रसन्न करने के लिए छठ का व्रत किया था।
खरना पूजा व अर्घ्य मुहूर्त
खरना पूजा- शुक्रवार शाम - 5:32 बजे से 7:40 बजे तक
अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य - शनिवार शाम 5:32 बजे तक
प्रात:काल सूर्य को अर्घ्य - रविवार सुबह 6:29 बजे के बाद
व्रत में इन चीजों की महत्ता
सूप, डाला-अर्घ्य में नए बांस से बने सूप व डाला का प्रयोग किया जाता है। सूप को वंश की वृद्धि और वंश की रक्षा का प्रतीक माना जाता है। ईख को आरोग्यता का प्रतीक माना जाता है। ठेकुआ-आटे और गुड़ से बना ठेकुआ समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। ऋतुफल-छठ पूजा में ऋतुफल का विशेष महत्व है।