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पुलिस-प्रशासन के लिए चुनौती बना गांव का कोटा

Thu, 11 Feb 2016 11:31 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/सिद्धार्थनगर
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खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू क्या हुआ, गांवों में फजीहत हो गई है। राशन-तेल के वितरण को लेकर आए दिन विवाद सामने आ रहे हैं। कहीं घटतौली हो रही है तो कहीं अधिक रेट लेने, खाद्यान्न से वंचित करने की शिकायतें हो रही हैं।
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गंवई चुनाव के बाद अब खाद्यान्न वितरण की इस व्यवस्था से गांवों में तनावपूर्ण माहौल हो गया है। खाद्य आपूर्ति महकमा समेत पुलिस-प्रशासन के लिए यह व्यवस्था चुनौतीपूर्ण हो गई है।

खाद्यान्न वितरण की पुरानी व्यवस्था को खत्म कर सरकार ने जनवरी माह से खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू कर दिया है। इसके तहत गरीब, वंचित और अभावग्रस्त तबके को खाद्यान्न की गारंटी दी गई है।
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ऐसे परिवारों का चयन पात्रता और गृहस्थी परिवार की दो श्रेणियों में किया गया है। पूर्व में प्रचलित अंत्योदय कार्ड के सभी लाभार्थी पात्रता श्रेणी में हैं।

इन्हें प्रत्येक कार्ड पर 35 किलो खाद्यान्न मिलना है। वहीं गृहस्थी श्रेणी में उन परिवारों का चयन है, जो पहले बीपीएल श्रेणी में थे। कई अन्य मानकों को पूरा करने वालों के नाम भी इस श्रेणी में शामिल किए गए हैं।

इसमें परिवार के प्रत्येक सदस्य को 5 किलो की दर अनाज मिलना है। इनका रिकार्ड बकायदे कंप्यूटर में फीड है और इसी आधार पर खाद्यान्न का आवंटन भी हो रहा है।

फीडिंग की खामियां और पर्याप्त प्रचार-प्रसार के अभाव में लोग अब तक इस व्यवस्था को समझ नहीं पाए हैं। कई गांवों में कोटेदार ही इसे समझ नहीं पाए हैं और विभाग भी इसे लोगों के बीच पहुंचाने में उदासीन बना हुआ है।

नतीजा शिकायत, विवाद और बवाल हर गांव में आम हो गया हैं। विवादों का ही असर है कि जिले के तमाम गांवों में खाद्यान्न का वितरण अब तक नहीं हो पाया है।

कार्डधारक यहां-वहां भटक रहे हैं। विभाग शिकायतों की जांच का हवाला देकर इन मामलों को लटकाए हुए हैं। जिला पूर्ति अधिकारी देवमणि मिश्रा ने बताया कि यह बात सही है कि पिछले एक माह में खाद्यान्न वितरण को लेकर शिकायतें बढ़ी हैं, इसका कारण फीडिंग में हुई गड़बड़ियां हैं।

इसे सुधारा जा रहा है। नाम-पते की त्रुटियों, छूटे नामों को जोड़ने के लिए आपत्तियां ली जा रही हैं। शीघ्र ही सब दुरुस्त हो जाएगा। वितरण से संबंधित अन्य जो भी शिकायतें हैं, उसकी जांच कराई जा रही है।
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