संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। इटवा कस्बे में फर्जी आधार कार्ड बनाने के मामले में कई संदिग्धों को पुलिस ने उठाया है। उनके कब्जे से लैपटॉप आदि बरामद किया है। हालांकि मामले में अभी तक पुलिस ने कोई खुलासा नहीं किया है और न तो कोई बयान जारी किया है। लेकिन, उसके पास अवैध आधार कार्ड और प्रमाणपत्र बनाने से जुड़े इनपुट मिले हैं।
इटवा पहले से ही फर्जी आधार कार्ड और अन्य प्रमाणपत्र बनाने को लेकर संवेदनशील रहा है। अभी फरवरी में ही इसी क्षेत्र के पांच आरोपी बलरामपुर में पकड़े गए थे, जहां एक गिरोह काम कर रहा था गिरोह में 11 सदस्य थे। वह आधार से लेकर के अन्य प्रमाणपत्र बनाते थे। जनपद नेपाल सीमा से सटा है। ऐसे में फर्जी दस्तावेज बनाने का कार्य यहां बड़ी घटना का केंद्र बन सकता है। इसको लेकर सुरक्षा एजेंसी अलर्ट है।
सीमावर्ती क्षेत्र में फर्जीवाड़ा करके आधार, जन्म प्रमाणपत्र बनाने का मामला सामने आ चुका है। फर्जी आधार कार्ड के जरिये जिले में जमीन बेचने के मामले में केस दर्ज हो चुका है। जानकारों का मानना है कि जनपद नेपाल सीमा से लगा है। ऐसे में बाहरी व्यक्ति प्रमाणपत्र बनाकर देश में कुछ भी कर सकता है। बीते वर्ष कोटिया बॉर्डर पर फर्जी नंबर प्रमाणपत्र और आधार कार्ड बनाने का खेल पकड़ा गया था। इसमें जन्म प्रमाणपत्र के जरिये आधार कार्ड बनाने का बड़ा रैकेट संचालित हो रहा था।
इसमें कोटिया के अलावा बढ़नी बॉर्डर भी संपर्क में आया था। इसमें बढ़नी से भी ग्राहक सेट करके कोटिया में भेजा जाता था। जहां पर यह कीमत फर्जी जानवर प्रमाण पत्र तैयार करके आधार कार्ड में बदलाव करता था। इसके बाद फरवरी में बलरामपुर में फर्जी जन्म प्रमाणपत्र आधार कार्ड और अन्य प्रमाणपत्र बनाने वाले रैकेट का पर्दाफाश हुआ।
इसमें जनपद सिद्धार्थनगर के इटवा थाना क्षेत्र के भटगांव और एक अन्य गांव के पांच लोगों को पकड़ा गया। गिरोह में 11 सदस्य थे। जो सीमावर्ती इलाकों में मुंहमांगी कीमत पर किसी का भी आधार कार्ड और प्रमाणपत्र जारी करते थे। यह अधिकारियों का डिजिटल हस्ताक्षर स्कैन करके उसी का प्रयोग करते थे। हूबहू दिखने वाले प्रमाणपत्र पर कोई पहचान भी नहीं पता था।
अब एक बार फिर सोमवार को इटवा कस्बे के एसबीआई के पास से कुछ संदिग्धों को पुलिस ने उठाया। उनके कब्जे से लैपटॉप कागजात और कुछ अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान बरामद किया है। पुलिस पूछताछ कर रही है। हालांकि 24 घंटे बाद भी इस मामले में कोई जानकारी नहीं दी गई है।
सूत्र बता रहे हैं कि पुलिस को ठोस इनपुट मिले हैं, साक्ष्य भी मिले हैं। क्योंकि लंबे समय से फर्जी वाड़े का खेल चल रहा था। जिनको जरूरत थी वह न जानकारी होने की वजह से और कुछ लोग जानकारी में रहने के बाद भी मुंहमांगी कीमत देकर अपना काम करवाते थे। कई बार शिकायत के बाद पुलिस ने दबोचने का काम किया है। अब जल्द ही इस मामले में कुछ बड़ा खुलासा होने वाला है।