सिद्धार्थनगर। ककरहवा बॉर्डर पर पिछले एक हफ्ते के भीतर सामने आई घटनाओं ने सीमा पर नकदी और संदिग्ध आवाजाही को लेकर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल ही में नेपाली मुद्रा के साथ दो बाइक सवार युवकों को पकड़ा गया, जबकि इसी दौरान दो विदेशी नागरिक भी सुरक्षा एजेंसियों की गिरफ्त में आए। लगातार सामने आ रहे इन मामलों से सीमा के बाजारों में दो मुद्राओं के चलन के बीच हवाला कारोबार का संदेह भी बढ़ रहा है।
पिछले तीन महीने में नेपाली करेंसी बरामद होने के सात मामले सामने आ चुके हैं। इनमें तीन को नकद का स्रोत दिखाने पर छोड़ दिया गया, जबकि चार पर कार्रवाई चल रही है। जानकार बताते हैं कि भारत-नेपाल सीमा से सटे ककरहवा और आसपास के बाजारों में भारतीय और नेपाली दोनों मुद्राओं में लेनदेन आम बात है। सीमावर्ती इलाकों में रोजमर्रा की खरीदारी और छोटे-बड़े व्यापार में दोनों देशों के लोग अपनी-अपनी मुद्रा का इस्तेमाल करते हैं।
यह व्यवस्था वर्षों से स्थानीय व्यापार का हिस्सा बनी हुई है लेकिन इसी बीच नकदी के संदिग्ध मूवमेंट के मामले भी समय-समय पर सामने आते रहते हैं, जिस पर सुरक्षा एजेंसियों की कड़ी नजर रहती है।
सूत्रों के अनुसार, सीमावर्ती इलाकों में कभी-कभी बड़ी मात्रा में नकदी के लेनदेन की जानकारी सामने आती है, जिससे सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो जाती हैं। ऐसी आशंका भी जताई जाती है कि खुले लेनदेन की इस व्यवस्था का फायदा उठाकर कुछ लोग अवैध नकदी या संदिग्ध रकम को इधर-उधर करने की कोशिश कर सकते हैं।