सिद्धार्थनगर। बिजली निगम हर तीसरे उपभोक्ताओं को समय से बिल नहीं दे रहा है। इस कारण उपभोक्ता कर्जदार हो रहे हैं और उनके ऊपर अतिरिक्त सरचार्ज का भार भी बढ़ रहा है। जिन उपभोक्ताओं को बिल है, उनमें अनेक लोग बिल सुधार कराने के लिए कार्यालयों का चक्कर काट रहे हैं, जबकि ऐसी लापरवाही से बिजली निगम का राजस्व भी प्रभावित हो रह है।
ऐसी स्थिति इसलिए है कि मीटर रीडिंग एजेंसी में 181 कर्मचारी ही बिल निकाल रहे हैं, जबकि 266 कर्मचारियों की आवश्यकता है। बिजली निगम के अनुसार मीटर रीडिंग कंपनी की कार्य अवधि चार माह ही शेष है।
इसलिए वहां नए कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं की जा रही है। इस फर्म में कर्मचारियों की संख्या लगातार कम हो रही है और उपभोक्ताओं की परेशानियां बढ़ती जा रही है। जिले में सितंबर में 71.56 एवं अक्तूबर 67.14 फीसदी बिलिंग हुई है, जबकि नवंबर में 12 तारीख तक 25 प्रतिशत लोगों को ही बिल मिला है।
जिले में चार लाख उपभोक्ताओं के बिजली निगम को 266 रीडर की जरूरत है, जबकि निजी कंपनी के पोर्टल पर 234 उपभोक्ता रजिस्टर हैं, लेकिन बिलिंग केवल 181 रीडर ही कर रह हैं।
इससे हर महीने 85 मीटर रीडर के क्षेत्रों में कोई भी बिलिंग कार्य नहीं हो पा रहा है। बिलिंग नहीं होने से उपभोक्ताओं को बिल की जानकारी नहीं हो पा रही है और वह समय से बिल भी जमा नहीं कर रहे हैं। उपभोक्ताओं को एक महीना देर से बिल जमा करने पर लगभग 50 रुपया अतिरिक्त चार्ज देना पड़ रहा है।
बिजली निगम के एक कर्मचारी के अनुसार एक रीडर महीने 1500 उपभोक्ताओं का बिल निकालेंगे। लेकिन, कई बार सर्वर नहीं चलने से रीडर एक दिन में 30 से 40 उपभोक्ता का ही बिल निकाल पाते हैं। ऐसे में रीडर कई बार टारगेट भी पूरा नहीं कर पाते हैं।
जिसका परिणाम है कि हर माह 90 प्रतिशत बिलिंग के सापेक्ष 67 से 75 प्रतिशत उपभोक्ताओं का बिल निकला जा रहा है। समय से बिल नहीं निकल पाने से उपभोक्ताओं पर कई माह के बिल का भार बढ़ रहा है, जबकि अतिरिक्त सरचार्ज भी देना पड़ रहा है।