नेपाल में बारिश से जिले की हर नदियों में तेजी से बढ़ रहा पानी
राप्ती नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी से सहमे बाढ़ प्रभावित गांव के लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। नेपाल समेत जिले में हो रही बारिश से 24 घंटे में ही नदियों के जलस्तर में उफान आ गया है। बूढ़ी राप्ती नदी के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी के कारण वह खतरे के लाल निशान के करीब पहुंच गई हैं। वहीं राप्ती नदी का जलस्तर भी चेतावनी के निशान तक पहुंच गया है। इससे बाढ़ प्रभावित गांव के लोग सहमे हुए है।
बूढ़ी राप्ती नदी का जलस्तर शुक्रवार को 83.04 मीटर था जो शनिवार सुबह तक 1.93 मीटर बढ़कर 84.97 मीटर पहुंच गया। यह खतरे के लाल निशान 85.650 मीटर से मात्र 68 सेमी दूर है। इससे बूढ़ी राप्ती नदी किनारे के इटवा, जोगिया, शोहरतगढ़ और उसका क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांव के लोग सहमे हुए हैं। जोगिया क्षेत्र के बाढ़ पीड़ित रामकेवल कहते है कि जब भी बूढ़ी राप्ती नदी का जलस्तर बढ़ता है तब पूरे क्षेत्र में तबाही मच जाती है।
दो वर्ष पहले आए बाढ़ में कई बांध टूट गए थे, जिससे फसल समेत बहुत संपत्ति की क्षति हुई थी। जिले की सबसे बड़ी नदी राप्ती के जलस्तर में भी बढ़ोतरी हो रही है। इस नदी के जलस्तर में बीते 24 घंटे के अंदर 49 सेमी की बढ़ोतरी हुई है, जो चेतावनी स्तर के करीब पहुंच गई है। इसी तरह बानगंगा, कूड़ा, घोघी नदियों समेत जमुआर और तेलार नाले में बढ़ोतरी हुई है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लोगों का कहना है कि अगर नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी का यही रफ्तार रहा तो अगले कुछ घंटों में ही नदियां खतरे के लाल निशान को पार कर जाएंगी।
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बढ़ा जमुआर, ढहा अंत्येष्टि स्थल का रेलिंग
नेपाल में हुई बारिश से शहर के बीच से बहने वाले जमुआर नाले के जलस्तर में भी बढ़ोतरी हुई है। 24 घंटे में इसका जलस्तर 45 सेमी बढ़ा है, जो खतरे के लाल निशान से कुछ दूरी पर है। इससे जहां नौगढ़ पुल के पास बने अंत्येष्टि स्थल की सीढ़ी पानी में डूब गई है, वहीं बगल में बना रेलिंग ढह गया है। जिससे यहां सुबह और शाम को आने वाले लोगों के लिए खतरा उत्पन्न हो गया है। शहरियों का कहना है कि रेलिंग ढहने से दाह संस्कार में शामिल होने वालों को परेशानी होगी।
कछार की सड़कों पर भरा पानी, आवागमन बाधित
बारिश से राप्ती और बूढ़ी राप्ती नदी के किनारे बने बांधों के बीच स्थित 50 से अधिक गांवों के आवागमन के लिए बनी सड़कों पर पानी भर गया है। इससे अजिगरा, इटौवा, तालभिरौना, रीवांनानकार, बैरवां नानकार, अमरिया, हरनी, टड़िया आदि गांवों के लोगों को आने जाने में दिक्कत हो रही है। वहीं बढ़नी और इटवा क्षेत्र में भी कई गांवों के सीवान में जलभराव हो गया है। उसका क्षेत्र के हथिवड़ताल गांव के टोला तिवारीडीह निवासी राधेश्याम कहते है कि बारिश के मौसम में हर समय बाढ़ का खतरा मंडराता है।
जोगिया क्षेत्र में सर्वाधिक 58 एमएम हुई बारिश
जिले में शुक्रवार से शनिवार सुबह तक बीते 24 घंटे में जमकर बारिश हुई है। इसमें सर्वाधिक बारिश जोगिया क्षेत्र के ककरही में 58 एमएम बारिश हुई है। वहीं शोहरतगढ़ बानगंगा के पास 31.25 एमएम, बांसी में 48.50 एमएम, इटवा परसोहन में 34.80, उसका क्षेत्र में 50.60 एमएम और नौगढ़ में 34.90 एमएम बारिश हुई है। लगातार दो दिन से हो रही बारिश से गांवों में किसान जहां खेत में धान की रोपाई में जुट गए है, वहीं शहर में कई मोहल्ले के लोग जलभराव की समस्या से जूझ रहे है।
नदियों का जलस्तर मीटर में
नदी खतरे का स्तर शुक्रवार शनिवार
राप्ती 84.900 81.83 82.26
बूढ़ी राप्ती 85.650 83.04 84.97
कूड़ा 83.520 79.80 80.48
घोघी 87.00 84.60 85.70
बानगंगा 93.420 91.70 92.20