निराशाजनक रहा बजट, कई वर्गों के हितों की अनदेखी
कइयों ने सराहा तो कइयों ने पुराने वादे दोहराने की बात कही
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अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। 17वीं लोकसभा का पहला बजट पेश हुआ। मोदी सरकार के पहले बजट में गांव-गरीब, किसान, नौजवान व व्यापारियों के लिए कई अहम योजनाओं व कार्यक्रमों को प्रमुखता से रखा गया है। बजट आने के बाद जनपद में भी हर वर्ग की प्रतिक्रिया मिलीजुली रही। किसी ने सराहा तो कइयों ने पुराने वायदे को दोहराने की बात कही है।
गुरुवार को लोकसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मोदी सरकार का पहला बजट पेश किया। बजट आने के बाद व्यापारी, महिलाओं, नौजवानों व किसानों से प्रतिक्रिया ली गई। अलग-अलग बयानों में किसी ने सराहा तो किसी ने बजट को निराशाजनक करार दिया है। किसान विनय भारती ने कहा कि मोदी सरकार का दूसरे कार्यकाल के पहले बजट से काफी उम्मीदें थी। किसानों के हित को लेकर कई अहम कदम उठाए जाएंगे, पर बजट का इस प्रकार का कोई जिक्र प्रमुखता से देखने को नहीं मिला। जिससे निराशा ही हाथ लगी। खेती-किसानी से जुड़े कमलेश दुबे का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में दोबारा सरकार बनने के बाद प्रस्तुत बजट में कृषकों के लिए हितकारी योजनाओं को लागू करने के साथ ही पूर्व में लागू योजनाओं में बेहतरी की आस जगी थी, पर ऐसा कुछ भी प्राविधान नहीं किया गया। यह किसानों के साथ सिर्फ छलावा है। एक महिला वित्तमंत्री के रूप में बजट पेश करने वाली निर्मला सीतारमण से महिलाओं को भी काफी उम्मीदें थी। शहर की निवासिनी सुनीता श्रीवास्तव कहती हैं कि मुद्रा योजना के तहत एक लाख तक लोन का प्राविधान किया गया है, पर महंगाई के इस दौरान में एक लाख के लोन से कौन सी भलाई होने वाली है। इस राशि की अधिकता को बढ़ाकर कम से कम 5 लाख करना चाहिए था। अरुणिमा का कहना है कि एक महिला वित्त मंत्री होने के बाद नारी समाज में काफी उत्साह था। महिलाओं के हित को लेकर कोई ठोस योजना व कार्यक्रम लागू किया जाएगा, पर ऐसा न होने से निराशा ही हाथ लगी है। व्यापारी अनूप कुमार छापड़िया का कहना है कि इनकम टैक्स रिटर्न पैन कार्ड के अलावा आधार कार्ड से भी भरे जाने के निर्णय का स्वागत किया है। स्टार्टअप के लिए जुुटाए गए धन की आयकर जांच न होने का भी निर्णय सराहनीय है। युवा व्यापारी ध्रुव कुमार यादव कहते हैं कि व्यापारियों के हितार्थ बजट में कोई खास प्राविधान न किए जाने से हताशा ही हाथ लगी है। व्यापार को बढ़ावा देने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। मोदी सरकार से बजट में आस लगाए युवा भी हताश हैं। समीर त्रिपाठी कहते हैं कि बजट में बेरोजगारी दूर करने को लेकर होने वाले उपायों का जिक्र न किया जाना काफी दुखदायी है। इससे युवा वर्ग हतोत्साहित है। अफरोज का कहना है कि रोजगार के सृजन को लेकर नया कुछ प्रस्तुत नहीं किया गया, पुरानी योजनाओं को भी बेहतर बनाने की पहल नहीं की गई।