संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। पुलिस की सतर्कता और जागरूकता से दो कदम आगे बढ़कर साइबर ठग लोगों को शिकार बना रहे हैं। जब तक पुलिस तरीका बदलती है, तब तक दूसरे तरीके से अपराध शुरू कर देते हैं। हालांकि, ठगी के मामले तो बढ़ रहे हैं, लेकिन पुलिस की सतर्कता से रिकवरी की दर भी बढ़ी है। अब ठग ने सरकार की सबसे महत्वपूर्ण योजना प्रसव पूर्व महिलाओं की दी जाने वाली धनराशि पर कुदृष्टि डाल दी है।
पोर्टल पर सेंधमारी करके ठग डाटा उठा रहे हैं, और आशा वर्कर के जरिये कॉल करके लाभार्थी से बात करके बैंक खाता और ओटीपी भेजकर खाते की धनराशि उठा ले रहे हैं। इस प्रकार की ठगी जिले में होने लगी है। अब तक कई महिलाएं ठगी का शिकार बन चुकी हैं। एक मामले में साबइर सेल में शिकायत भी हुई है। साइबर एक्सपर्ट बिना जाने किसी को ओटीपी नंबर, खाता नंबर आदि देने से मना कर रहे हैं।
उनका कहना है कि ऐसा करने से ठगी से बच सकते हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो जनपद में 3000 से 3500 प्रति माह डिलीवरी होती है, और लाभार्थियों को प्रतिमाह 42 लाख से अधिक प्रोत्साहन राशि दी जाती है।
इस प्रकार से बना रहे शिकार: ऑनलाइन भुगतान और डाटा के दुरुपयोग के जरिये ठग महिलाओं को फोन कर खुद को सरकारी कर्मी बताकर जानकारी हासिल कर रहे हैं और देखते ही देखते खाते से रुपये उड़ा ले रहे हैं। दरअसल, मातृत्व लाभ योजना सहित अन्य सरकारी योजनाओं में पंजीकृत गर्भवतियों का नाम, मोबाइल नंबर और भुगतान से जुड़ी जानकारी किसी न किसी स्तर पर ऑनलाइन उपलब्ध रहती है। इसी डाटा को आधार बनाकर साइबर ठग महिलाओं को कॉल करते हैं। वह लाभार्थी व आशा वर्कर के नंबर पर प्रोत्साहन राशि खाते में भेजने, भुगतान अटकने का डर दिखाकर ओटीपी नंबर और बैंक खाते की जानकारी पूछते हैं। पहले एक से पांच रुपये खाते में भेज दे रहे हैं। जब महिला बता रही है कि मिल गया है तो विश्वास में आकर जैसे ही ओटीपी साझा की जाती है, खाते से रकम साफ कर दी जाती है।