रामपुर के शाहबाद में धम्म चेतना यात्रा को संबोधित करते भंते
बर्डपुर। जूता पहन कर स्तूप व बुद्ध प्रतिमा पूजन के विरोध में शुक्रवार को बौद्ध भिक्षु भी उतर गए। कृत्य की कड़े शब्दों में निंदा की। प्रकरण को शासन व उच्चाधिकारियों के संज्ञान में देने के संबंध में बैठक किया। बौद्ध भिक्षुओं ने पर्यटन विभाग से मांग की है कि स्तूप के चारों तरफ घेरा बनाएं ताकि इस प्रकार की घटना की पुनरावृत्ति न हो सके।
जिले के स्थापना दिवस के अवसर पर प्रशासनिक अधिकारियों ने गुरुवार सुबह नगर, बर्डपुर व कपिलवस्तु स्थित स्तूप का पूजन किया था। लेकिन अधिकारियों पर ठंड का इतना अधिक असर दिखा कि वह धर्म की संस्कृति भूल गए। जूता पहनकर पूजन किया। भंते धम्मानंद ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों ने जो कृत्य किया है, वह निंदनीय है। किसी भी धर्म में नहीं दर्शाया गया है कि जूता, चप्पल पहन कर पूजन किया जाए। इससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है। भंते आनंद सागर ने कहा कि प्रशासन को पूर्व के वर्षों में हुए आयोजन से सीख लेना चाहिए था। पूर्व के अधिकारी पूजन से पहले स्तूप को फूल माला से भव्य स्वरूप देते रहे।
इसके बाद वह जूता को उतार कर पूजन करते रहे। लेकिन इस बार प्रशासनिक अधिकारियों ने परंपरा को तोड़ दिया। भंते बुद्ध सागर ने कहा कि स्तूप पर अगर कोई सामान्य व्यक्ति जूता पहन कर चढ़ता तो उसे मानवीय भूल मानी जाती, लेकिन बड़े पद पर आसीन अधिकारियों से ऐसी गलती की कोई उम्मीद नहीं थी। ऐसे कृत्य का उन्हें प्रायश्चित करना चाहिए।
भंते आनंद ने कहा कि बौद्ध धर्म का जन्म इसी स्थान से होना माना गया है। ऐसे में जन्म स्थली पर इतनी बड़ी भूल होना, सोचनीय विषय है। भंते बुद्ध रत्न ने कहा कि आगे से ऐसी घटना का पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए पर्यटन विभाग स्तूप के चारों तरफ ग्रिल लगाए। स्थापना दिवस पर होने वाले तीन दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन भी कपिलवस्तु में किया जाए।