संवाद न्यूज एजेंसी
घोसियारी। मनुष्य के दैहिक एवं भौतिक तापों की नष्टकारिणी और जीवन में ज्ञान मंगल सुख प्रदान करने वाली श्रीमद्भागवत महापुराण कथा मोक्षदायिनी है। भागवत कथा दैविक पुण्य लाभ प्रदान करने के साथ-साथ मनुष्य को निष्काम भक्ति के भाव से जोड़ती है। इसके चलते मानवता का प्रतिपादन करते हुए मानव जीवन धन्य हो जाता है।
यह बातें छितही में चल रही श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के पहले दिन आचार्य धनंजय महाराज ने कही। संगीतमय कथा के माध्यम से कथा व्यास ने गणेश महिमा और कथा श्रवण से होने वाले लाभ के बारे में श्रद्धालु को समझाया। आचार्य ने कहा कि प्रेम ही संसार का सार है।
यह जगत इसी से तार-तार बंधा है। श्रीमद्भागवत पुराण को भगवान कृष्ण का साहित्यिक अवतार माना जाता है। श्रीमद्भागवत कथा सुनने से आध्यात्मिक विकास और भगवान के प्रति भक्ति गहरी हो जाती है। श्रीमद्भागवत कथा स्वयं की प्रकृति और परम वास्तविकता के बारे में सिखाती है। इसके द्वादश स्कंध संपूर्ण वेद शास्त्र व पुराणों का सार है।
भक्त सम्यक विधि से जो नियम पूर्वक नित्य इसे श्रवण करता है, उसे परमानन्द की प्राप्ति होती है। भागवत कथा को सुनकर किसी फल की कामना नहीं करनी चाहिए, बल्कि श्रीमद्भागवत श्रवण करना ही अपने आप में सबसे बड़ा फल है। भागवत कथा दैविक पुण्य लाभ प्रदान करने के साथ-साथ मनुष्य को निष्काम भक्ति के भाव से जोड़ती है, जिसके चलते मानवता का प्रतिपादन करते हुए मानव जीवन धन्य हो जाता है।
इस दौरान चंद्रमणि मिश्र, दूधनाथ,अश्विनी, अजय कुमार, डॉ. संजय मिश्र, शिवप्रसाद, अर्जुन आदि मौजूद रहे।