भनवापुर। भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप का असर अब सिर्फ जनजीवन पर ही नहीं बल्कि पान के कारोबार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। क्षेत्र में कोलकाता से आने वाला मशहूर पान का पत्ता इन दिनों न सिर्फ सिकुड़ गया है बल्कि उसका आकार भी पहले की तुलना में काफी छोटा हो गया है। इसके साथ ही सुपारी, कत्था और अन्य पान सामग्री के दामों में भी तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। इस स्थिति ने पान के शौकीनों और दुकानदारों दोनों की चिंता बढ़ा दी है।
स्थानीय पान व्यापारियों के अनुसार, बीते कुछ हफ्तों से पड़ रही तेज गर्मी और लगातार पड़ रही धूप के कारण पान की फसल पर सीधा असर पड़ा है। गर्मी के चलते पत्ते पीले पड़ने लगे हैं और उनकी गुणवत्ता में भी गिरावट आई है। इसका असर बाजार की आपूर्ति पर भी पड़ा है। बंगाल से आने वाला पान पहले जहां पर्याप्त मात्रा में मंडियों में पहुंच जाता था, वहीं अब इसकी आवक में कमी देखी जा रही है। कोलकाता से कानपुर मंडी होते हुए तहसील क्षेत्र में पहुंचने वाली सप्लाई में गिरावट के चलते बाजार में असंतुलन की स्थिति बन गई है।
आवक घटने और लागत बढ़ने का सीधा असर कीमतों पर पड़ा है। दुकानदारों का कहना है कि अब पान के भाव पहले की तुलना में काफी बढ़ गए हैं, जिससे उन्हें मजबूरी में खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी करनी पड़ रही है। पान विक्रेता कन्हैया ने बताया, पहले जो पान की एक ढोली 600 रुपये में आसानी से मिल जाती थी, अब उसके 750 रुपये तक लिए जा रहे हैं। लगातार बढ़ रही लागत और कम सप्लाई की वजह से हमें दाम बढ़ाने पड़ रहे हैं। ग्राहक भी अब पहले जितना पान नहीं ले पा रहे हैं, जिससे बिक्री पर असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि अगर यही स्थिति रही तो आने वाले दिनों में पान के दाम और बढ़ सकते हैं।
वहीं, दूसरे दुकानदार संजय चौरसिया ने बताया कि सिर्फ पान का पत्ता ही नहीं बल्कि सुपारी, कत्था और अन्य सामग्री भी महंगी हो गई है। उन्होंने कहा पहले जो सुपारी 500 रुपये प्रति किलोग्राम मिल रही थी, अब उसकी कीमत बढ़कर लगभग 700 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। इसी तरह कत्था और अन्य सामग्री के दाम भी लगातार बढ़ रहे हैं। इससे पान का पूरा सेट महंगा हो गया है।
संजय चौरसिया ने आगे कहा कि गर्मी के कारण पत्तों की गुणवत्ता प्रभावित होने से उनकी बिक्री पर भी असर पड़ा है। छोटे और पीले पत्तों की वजह से ग्राहक संतुष्ट नहीं हो पा रहे हैं। कई बार दुकानदारों को कम मुनाफे में भी सामान बेचना पड़ रहा है ताकि ग्राहक जुड़े रहें।