नेपाल सीमा पर स्थित धनौरी ग्राम पंचायत की मतदाता सूची से सैकड़ों ग्रामीणों के नाम काटकर बाहरी लोगों को वोटर बनाने पर जमकर बवाल हुआ। उग्र ग्रामीणों ने बूथ पर विरोध जताया। मतदान रुकवाकर धरने पर बैठ गए।
सेक्टर मजिस्ट्रेट की पड़ताल में ढाई सौ लोगों के नाम लिस्ट से गायब पाए गए। मामले में बीडीओ, एडीओ व मौजूदा प्रधान समेत चार को जिम्मेदार मानते हुए सेक्टर मजिस्ट्रेट ने मुकदमा दर्ज कराया है।
बढ़नी ब्लॉक का धनौरी उर्फ जिगनिहवां गांव नेपाल सीमा पर जिले का अंतिम गांव है। मंगलवार को दूसरे चरण के मतदान में मंगलवार को जब ग्रामीण वोट देने पहुंचे तो कइयों के नाम लिस्ट में नहीं थे।
पहले तो एक-दो नाम गायब समझ लिस्ट की त्रुटि समझी गई, मगर दोपहर बाद करीब दो सौ से अधिक लोग लिस्ट में नाम न होने के कारण लौटा दिए गए। यह वह मतदाता थे, जिन्होंने डेढ़ माह पहले हुए बीडीसी और जिला पंचायत के चुनाव में वोट दिया था।
वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने हंगामा शुरू कर दिया। बड़ी संख्या में एकजुट होकर ग्रामीणों ने दोपहर ढाई बजे मतदान रोक दिया और बूथ के बाहर धरने पर बैठ गए। सुरक्षा कर्मियों हल्का बल प्रयोग कर उन्हें खदेड़ने की कोशिश की, लेकिन ग्रामीण मौके पर डटे रहे। सूचना पाकर सेक्टर मजिस्ट्रेट विमल कुमार शुक्ला मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों से पिछले चुनाव में मतदाता होने का प्रमाण मांगा।
दस्तावेजों की छानबीन के बाद सेक्टर मजिस्ट्रेट की रिपोर्ट व जोनल मजिस्ट्रेट के निर्देश पर पुलिस ने बढ़नी ब्लाक के खंड विकास अधिकारी, सहायक विकास अधिकारी पंचायत, ग्राम प्रधान धनौरा और बीएलओ के खिलाफ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। एफआईआर की प्रति मिलने के बाद ग्रामीणों ने धरना खत्म किया।