सिद्धार्थनगर/बांसी। बारिश के साथ उफनाई नदियों से जर्जर बांधों पर खतरा मंडराने लगा है। बीते दो दिन से नीचे आने के बाद बानगंगा का जलस्तर स्थिर हो गया है। वहीं, बाकी नदियाें में गिरावट दर्ज की गई है। जलस्तर ऊपर-नीचे होने से नदिया कटान कर रही हैं।
वहीं, कई बांधों के कमजोर और जर्जर होने से उनके किनारे बसे गांवों की सुरक्षा खतरे में है। बाढ़ के मद्देनजर सतर्क हुए प्रशासन और सिंचाई विभाग के अफसर व कर्मचारी बांधों व संवेदनशील कटान स्थलों की निगरानी में जुट गए है। वहीं, जर्जर बांधों के टूटने से मची तबाही याद कर ग्रामीण सहमे हुए हैं।
नेपाल के पहाड़ों और जिले में हो रही बारिश से नदियों का जलस्तर में घट-बढ़ रहा है। लगातार चार दिनों बढ़ रही राप्ती नदी का जलस्तर बृहस्पतिवार सुबह से घटने लगा। मंगलवार को खतरे के निशान को पार कर चुकी बूढ़ी राप्ती के जलस्तर में भी गिरावट हुई है और नदी लाल निशान से नीचे आ चुकी है। इसके अलावा कूड़ा व घोघी नदी का जलस्तर भी लाल निशान से नीचे है। इसके बावजूद नदियों के कटान से बाढ़ का खतरा बना हुआ है।
बता दें कि बाढ़ से बचाव के लिए जिले में नदी किनारे बने 454 किमी लंबे 39 बांध ही आसपास के गांवों के लोगों की सुरक्षा करते हैं। वहीं नदियों के अत्याधिक जलस्तर बढ़ने पर इनके टूटने से बड़ी तबाही मचती है। बूढ़ी राप्ती नदी के दक्षिणी पश्चिमी तट पर बना असोगवा नगवा बांध नदी का जलस्तर बढ़ने पर सात वर्षों में तीन बार टूट चुका है। इस बीच तीनों कटान स्थल सतवाढ़ी, डढ़िया और नगवा के निकट हुए कटान पर ही काम हुआ है। राप्ती व बूढ़ी राप्ती नदी के दोनों छोर पर बने सभी बांधों को सिंचाई विभाग पूरी तरह सुरक्षित बता रहा है। दोनों नदियों के तट पर बने बांसी-डुमरियागंज, डुमरियागंज-बांसी, बांसी-पनघटिया, सोनखर-हाटा, नरकटहा-सोनखर, जमींदारी सहित सभी बांध के रख-रखाव का काम किया गया है। इसके बावजूद जगह-जगह रेन कट और रैट होल बने हुए हैं तो खतरा बढ़ा रहे हैं। यही नहीं इन बांधों में बड़े-बड़े नरकट और झाड़ उगे हुए हैं जो बांध कमजोर कर रहे हैं। ऐसे में नदी का जलस्तर बढ़ने पर रिसाव को रोकने में भी दुश्वारी होगी।
सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता मनीष सिंह कहते है कि संभावित बाढ़ के मद्देनजर सभी बांध पर कार्य हुए हैं। सभी बांध सुरक्षित हैं।
बांध टूटने पर घिर जाते है कई गांव, मचती है तबाही : राप्ती और बूढ़ी राप्ती नदी के किनारे स्थित बांधों के टूटने से बीते वर्षों में जिले में काफी तबाही मच चुकी है। आठ वर्ष पूर्व इटवा क्षेत्र में बूढ़ी राप्ती नदी के दाएं तट पर स्थित दलपतपुर परसोहन बांध के टूटने से कई गांव जलमग्न हो गए थे। बांसी क्षेत्र में राप्ती किनारे के तटबंध टूटने पर कई गांवों में पानी घुस गया था जबकि बूढ़ी राप्ती नदी के किनारे बने लखनापार-बैदौला बांध टूटने से जोगिया ब्लॉक क्षेत्र के कई गांव जलमग्न हो गए थे। इससे गांव के कई परिवार ऊंचे स्थानों पर पलायन कर गए थे लेकिन कई ऐसे भी परिवार रहे, जिन्होंने अपनी छत पर ही डेरा डाल रखा था। धूरे बांध से खतरा, डूबेंगे सैकड़ों गांव : शाहपुर। शाहपुर से भोजपुर बांध निर्माण कार्य अधूरा रहने से ग्रामीणों में डर का माहौल है। 40 किमी लंबे शाहपुर से भोजपुर बांध के बीच जगह-जगह गैप हैं। कहीं मिट्टी न मिलने तो कभी बजट नहीं होने के कारण आज तक गैप भरे नहीं जा सके हैं। वहीं, बांध के निर्मित हिस्से में भी बारिश के पानी या रैट होल के कारण क्षतिग्रस्त होकर दरारें नजर आ रही हैं। वर्ष 2023-24 में आई बाढ़ में पानी के दबाव के चलते शाहपुर से धनोहरा गांव के सरहद तक यह बांध दो स्थानों पर कट गया था। इसके गैप अब तक नहीं भरे गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मछिया से फत्तेपुर गांव के बीच करीब डेढ़ से दो किलोमीटर गैप है।