सिद्धार्थनगर। गांव में एक कहावत है कि मूल से ज्यादा लोग सूद पर ध्यान देते हैं। इसका अर्थ है कि बेटे से अधिक प्रेम और अपनत्व पोते से हो जाता है। यह मंगलवार को सच साबित हो गया। लोटन कोतवाली क्षेत्र के बरवां गांव में पोते की हत्या के बाद उसका नाम पुकारते और रोते-रोते बाबा ने दम तोड़ दिया। लोगों ने बताया जब से हत्या की जानकारी मिली थी, वह खाना पानी छोड़ दिए थे। अंतिम सांस तक पोते रोहित को पुकारते रहे।
लोटन कोतवाली क्षेत्र के बरवां गांव निवासी रोहित पुत्र दारा की 15 अगस्त को हत्या हो गई थी। उसकी हत्या के बाद उसे बाबा मुन्नीलाल हर वक्त रोहित को ही बुलाते रहे और कहते रहे कि मेरा रोहित कहां गया। घटना के बाद से ही खाना पीना छोड़कर पागलों की तरह उसी का नाम लेते रहे। पेट में अनाज न जाने के कारण वह मानसिक व शारीरिक रूप से कमजोर होते गए।
मंगलवार को जब सुबह उठे तो बाबू बाबू कहते चारपाई पर ही लुढ़क गए। परिवार वालों ने दौड़ कर देखा तो उनकी मौत हो चुकी थी। जिससे पूरे परिवार में कोहराम मच गया। घटना के हुए सात दिन के अंदर बाबा के हुए मौत ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया। मौत की खबर सुनकर जो लोग वहां पहुंचे परिजनों का विलाप सुनकर सबकी आंखें नम हो गई। गांव वालों ने अपने व्यवस्था कर बाबा के शव का दाह संस्कार किया। ईश्वर जाने बाबा का नाती से क्या लगाव था कि रोहित के जाते ही अपना भी प्राण त्याग दिया।