चिल्हिया चौराहे पर यात्रियों के बैठने की कोई उचित सुविधा नहीं। संवाद
सिद्धार्थनगर। जिले में रात होते ही शहर में परिवहन व्यवस्था लगभग ठप हो जाती है। रात 9-10 बजे के बाद सड़कों से ऑटो, ई-रिक्शा और बसें गायब हो जाती हैं, जिससे राहगीरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी रेलवे स्टेशन, अस्पताल और नाइट शिफ्ट में काम करने वालों को हो रही है। शोहरतगढ़ और इटवा क्षेत्र में रात के समय सवारी न मिलने की समस्या आम हो गई है। स्थानीय निवासी रामविलास (शोहरतगढ़) बताते हैं कि रात में स्टेशन से उतरने के बाद घर पहुंचना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है। कई बार 2-3 किलोमीटर पैदल जाना पड़ता है या फिर दोगुना किराया देकर किसी निजी वाहन से जाना पड़ता है।
इसी तरह रीना देवी (इटवा), जो अस्पताल में अपने मरीज के साथ रहती हैं, कहती हैं कि रात में दवा लेने या किसी काम से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। ऑटो या ई-रिक्शा नहीं मिलते, मजबूरी में महंगी गाड़ियों का सहारा लेना पड़ता है।
नाइट शिफ्ट में काम करने वाले संजय कुमार (बांसी रोड) का कहना है कि ड्यूटी खत्म होने के बाद घर लौटना सबसे बड़ी परेशानी है। रात में सवारी नहीं मिलने से या तो पैदल चलना पड़ता है या किसी जान-पहचान वाले को बुलाना पड़ता है।
वहीं, चालकों की अपनी मजबूरी है। एक ऑटो चालक इकराम (शोहरतगढ़) ने बताया कि रात में सवारी बहुत कम मिलती है, जिससे खर्च भी नहीं निकल पाता।
इसका खामियाजा आम लोगों को उठाना पड़ रहा है। कई बार लोग मजबूरी में पैदल चलते हैं या प्राइवेट साधनों का सहारा लेते हैं, जिससे उनका खर्च बढ़ जाता है।क