क्षेत्र पंचायतें नहीं खर्च कर सकेंगी धनराशि
सिद्धार्थनगर। राज्य वित्त एवं केंद्र (15वां वित्त) से जिले के 14 ब्लॉकों में 20 दिन पहले आवंटित हुई धनराशि कैसे खर्च हो सकेगी, जबकि ब्लॉक प्रमुख का कार्यकाल 17 मार्च को खत्म हो रहा है। वहीं पिछले बजट को भी खर्च करने में यह ब्लॉक फिसड्डी रहे हैं।
ग्राम पंचायतों एवं जिला पंचायत का कार्यकाल समाप्त हो चुका है और वहां प्रशासक नियुक्त हो गए है। ऐसे में विकास कार्यों के लिए राज्य वित्त एवं केंद्रीय वित्त से आवंटित 5.30 करोड़ रुपये की धनराशि कैसे खर्च होंगे। जबकि पिछले वर्ष आए 5.30 करोड़ में अब भी डेढ़ करोड़ रुपये अवशेष बचे हैं। ग्रामीण मणिकांत तिवारी, मनोज राय, पंकज श्रीवास्तव और अजय पांडेय का कहना है कि आवंटित धनराशि से ग्रामीण क्षेत्र में नियमानुसार और निर्धारित समय में विकास कार्य नहीं होने से क्षेत्र का विकास कार्य प्रभावित होता है। जिम्मेदारों की लापरवाही से अब तक कई गांवों को जोड़ने वाली सड़क एवं नालियों का निर्माण नहीं हो सका है। जिला विकास अधिकारी शेषमणि सिंह का कहना है कि आवंटित धनराशि से कार्य कराया जा रहा है। ब्लॉकों का कार्यकाल कम होने से जो धनराशि अवशेष रहेगी, उससे बाद में विकास कार्य कराए जाएंगे।
डुमरियागंज को मिला सर्वाधिक धन
जिले के 14 ब्लॉकों में केंद्र एवं राज्य वित्त की सर्वाधिक धनराशि 53.05 लाख रुपये डुमरियागंज ब्लॉक को आवंटित हुई है। जबकि मिठवल ब्लॉक को 50.64 लाख, खुनियांव 49.55, इटवा 37.16, भनवापुर 44.28, बांसी 35.17, बर्डपुर 32.03, नौगढ़ 32.98, लोटन 24.19, शोहरतगढ़ 29.12, बढनी 34.08, जोगिया 32.11, खेसरहा 46.65 और उसका ब्लॉक को 24.52 लाख रुपये आवंटित हुए है। जिला पंचायत को भी इस वित्त वर्ष में 5.25 करोड़ रुपये आवंटित हुए है। जिला पंचायत एवं संबंधित ब्लॉकों को इतनी ही धनराशि एक वर्ष पूर्व भी आवंटित हुई थी।
इसी धन से निर्मित हो सकेगा सड़क व नाली
ग्राम पंचायतों को आवंटित केंद्र वित्त एवं राज्य वित्त की धनराशि से गांवों में सड़क एवं नाली निर्माण कार्य नहीं कराए जा सकते। ग्राम पंचायतों को आवंटित धनराशि से सामुदायिक शौचालय एवं पंचायत भवन के निर्माण के साथ स्कूलों का कायाकल्प होना है। इसलिए ब्लॉकों एवं जिला पंचायत को आवंटित केंद्र एवं राज्य वित्त की धनराशि से ही ग्रामीण क्षेत्र में सड़क एवं नाली निर्माण कार्य हो सकेंगे। जबकि जिला एवं क्षेत्र पंचायतों के कार्यों के क्रियान्वयन की धीमी गति के कारण ग्रामीण क्षेत्र में विकास प्रभावित हो रहे हैं।