सिद्धार्थनगर। ये चंद मामले तो सिर्फ नजीर हैं। बोर्ड परीक्षा के लिए केंद्र बनाने में जमकर मनमानी हुई है। मानकों को दरकिनार कर कई ऐसे स्कूलों को केंद्र बनाया गया है, जिनके पास पर्याप्त संसाधन ही नहीं है। विवादित स्कूल केंद्र बने हैं तो वहीं वर्षों से केंद्र बनते आ रहे मुख्यालय के स्कूलों की अनदेखी की गई है। यही नहीं, साढ़े तीन सौ की क्षमता वाले स्कूल पर 1200 बच्चों का आवंटन कर दिया गया है।
केंद्रों की सूची सामने आने के बाद विद्यालय संचालक माथा पकड़ लिए हैं। तमाम अनियमितताओं के बीच शांतिपूर्ण और पारदर्शी ढंग से परीक्षा कराना चुनौतीपूर्ण हो गया है। जिले में पंजीकृत हाईस्कूल व इंटर के 54 हजार छात्र-छात्राओं के लिए कुल 63 केंद्र बनाए गए हैं। गुरुवार की शाम केंद्रों की सूची वेबसाइट पर अपलोड कर दी गई।
सूची देख स्कूल संचालकों के होश उड़ गए हैं। शुक्रवार की सुबह से ही डीआईओएस कार्यालय पहुंचकर आपत्ति दर्ज कराने का सिलसिला जारी रहा। पहले दिन करीब दर्जन भर आपत्तियां पहुंची हैं। इस संबंध में डीआईओएस डॉ. आरबी मौर्य का कहना था कि केंद्र निर्धारण बोर्ड स्तर से हुआ है। इनमें उनकी भूमिका नहीं है। वैसे यह अनंतिम सूची है। आपत्तियां मिलने के बाद उनका समुचित निस्तारण किया जाएगा।