जांच में खेल कर बचा रहे थे एंटीजन टेस्ट किट
दो हजार एंटीजन जांच किट की कालाबाजारी करने के मामले की जांच जारी
एसओजी की टीम ने चार स्वास्थ्य कर्मियों को किट के साथ किया था गिरफ्तार
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। एंटीजन टेस्ट किट की हेराफेरी करने के मामले में जांच जारी है। चार स्वास्थ्यकर्मी जेल जा चुके हैं। अभी कुछ लोग संदेह के घेरे में हैं, जिन पर पुलिस टीम की नजर है। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े लोगों का मानना है कि कोरोना जांच में खेल करते हुए रिपोर्ट में हेराफेरी करके ही एंटीजन टेस्ट किट छुपाते थे।
दरअसल कोरोना जांच के लिए आने वाली एंटीजन टेस्ट किट को बेचने वाले गिरोह के चार सदस्यों को डीएम के निर्देशन में गठित प्रशासनिक और एसओजी की संयुक्त टीम ने दो दिन पूर्व गिरफ्तार किया था। इनके कब्जे से दो हजार एंटीजन टेस्ट किट बरामद हुआ। पूछताछ में पटना में बेचने की बात सामने आई थी। मामला सामने आने के बाद हड़कंप मचा और आनन-फानन में स्वास्थ्य विभाग ने भी जांच शुरू कर दी। मगर जो तथ्य सामने आ रहे हैं, उससे यह स्पष्ट है कि किट को यह गिरोह लंबे दिनों से जुटा रहे थे। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े लोगों की माने तो एक बार में जांच के लिए एक कर्मी को केवल 100 किट दिया जाता है। साथ ही आरटीपीसीआर किट भी दी जाती है। ऐसे में चार लोग एक दिन में दो हजार किट कहीं से नहीं निकाल सकते हैं। इसे एकत्र करने में उन्हें समय लगा होगा। साथ ही योजनाबद्ध तरीके से इस खेल को अंजाम दिया गया है, जिससे पकड़ में न आएं। अभी तक चले जांच में स्टॉक में गड़बड़ी की बात सामने नहीं आई है। अगर सब कुछ सही है तो सवाल यह है कि किट आई कहां से। एसपी रामअभिलाष त्रिपाठी ने बताया कि मामले की जांच जारी है। टीम लगी हुई है, हर बिंदुओं पर जांच की जा रही है। वहीं सीएमओ डॉ. संदीप चौधरी ने बताया कि जांच के लिए टीम बनी है। जांच जहां से गड़बड़ी मिलेगी कार्रवाई की जाएगी।
गड़बड़ी करने की तरीका
स्वास्थ्य विभाग के जानकारों की माने तो सामान्य व्यक्ति जिसमें हल्का कोरोना का लक्षण होता है, उसकी जांच एंटीजन से की जाती है। वहीं जिसकी हालात खराब रहती है या फिर एंटीजन में रिपोर्ट नहीं आने पर आरटीपीसीआर की जांच होती है। मगर कालाबाजारी करने के लिए जांच में एंटीजन के बजाए आरटीपीसीआर जांच की गई होगा। रिपोर्ट में दो जांच दिखाकर एंटीजन किट बचा लिया गया होगा। इस प्रकार से किट को बचाकर बेचने काम किया किया गया है।
इसलिए एंटीजन टेस्ट किट को बेचना सुरक्षित
स्वास्थ्य कर्मियों ने इसलिए एंटीजन को बेचने की योजना तैयार किया कि उसने में तत्काल रिपोर्ट मिल जाती है। जब महामारी चरम पर थी जो जांच के लिए मारामारी थी। एंटीजन जांच किसी लैब में भेजने की जरूरत नहीं पड़ती है और तत्काल रिपोर्ट मिल जाती है। जबकि आरटीपीसीआर जांच सरकारी अस्पताल वह भी गोरखपुर, लखनऊ, बनारस आदि स्थानों पर होता। आरटीपीसीआर किट चोरी करते तो उसका कोई फायदा उन्हें नहीं होता, क्योंकि सैंपल के बाद जांच का कोई साधन नहीं है। इसलिए एंटीजन किट को बेचने का काम शुरू किया जो आसानी से संभव था।