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Siddharthnagar News: तपिश और पेट की आग से जानवर आक्रामक, लोगों को पहुंचा रहे नुकसान

Wed, 17 Jun 2026 11:46 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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सिद्धार्थनगर। बदलते माहौल और जलवायु का असर केवल इंसान पर पड़ता है, यह आपके जेहन में अक्सर चलता है, लेकिन इससे इतर जानवर भी इससे प्रभावित होते हैं। आप के करीब रहने वाले कुत्ते, बिल्ली, बंदर और छुट्टा पशुओं पर गौर करेंगे तो आपको उनके व्यवहार में भी बदलाव दिखेगा। जिस तरह मौसम और परिस्थितियां इंसान को प्रभावित करती हैं। ठीक उसी तरह पेट की भूख, अधिक गर्मी और इंसानों की दुत्कार से पशु भी आक्रामक हो जाते हैं। ऐसा पशु विशेषज्ञों का मानना है। इटवा कस्बे और आसपास के गांवों में कुत्ते का आतंक इस बात की तस्दीक करती है।
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कुत्ते ने एक दिन 22 लोगों को काट लिया। वहीं, चार दिन पहले खेसरहा क्षेत्र में एक सांड ने एक किसान पर हमला कर दिया। इससे उसका हाथ टूट गया। किसी तरह से उसकी जान बच सकी। पशु विशेषज्ञों का मानना है कि, गर्मी जितनी ही इंसान के दिमाग पर असर डालती है। लगभग उतना ही पशुओं पर। खास करके कुत्तों में और अधिक देखने को मिलती है, क्योंकि उन्हें गर्मी अधिक लगती है। इसलिए चिड़चिड़ा हो जाते हैं और हमला करना शुरू कर देते हैं। ऐसे में मौसम के अनुकूल होने तक बच्चों और बुजुर्गों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
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बदलती मानसिक स्थिति बन रही वजह
जनपद में कुत्तों की आबादी में लगातार इजाफा हो रहा है लेकिन उनके नियंत्रण की कोई व्यवस्था नहीं है। कुत्तों के संरक्षण और शेल्टर के संबंध में कोर्ट की ओर से आदेश किया गया था। कुछ स्थानों पर कुत्तों के पकड़ने का काम फौरी तौर पर हुआ, लेकिन स्थिति जस की तस है। आबादी में इजाफा जारी है।
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विभाग के आकड़ों पर गौर करें तो जिले में पिछली पशु गणना में 19 हजार घुमंतू कुत्ते पाए गए थे। इनमें नगर पालिका और ग्रामीण क्षेत्र दोनों हैं। नगर क्षेत्र में संख्या कुछ अधिक हैं। पशु विशेषज्ञों के अनुसार, एक कुत्ते की उम्र पांच से सात वर्ष के करीब मानी जाती है। ऐसे में हर साल प्रजनन होता तो संख्या बढ़कर 25 हजार के करीब पहुंच गई होगी। इसका कारण जनपद में घुमंतू कुत्तों की नसबंदी की कोई व्यवस्था नहीं है। वर्ष 2024-2025 के मध्य अप्रैल से जून के बीच में दो से तीन बच्चों समेत चार की जान चली गई थी। वहीं, इसके अलावा 2026 में जनवरी माह में एक बच्चे को कुत्ते ने काटा था, कुछ दिन बाद उसकी मौत हो गई थी।
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चिड़चिड़ापन और छांव न मिलने पर जानवर आक्रामक

पशुधन प्रसार अधिकारी अरुण कुमार प्रजापति और भनवापुर के पशु चिकित्साधिकारी डॉ. उपेंद्र शर्मा ने बताया कि गर्मी में प्रतिरोधक क्षमता कम होने और पानी की कमी होने के कारण इंसान गुस्से में आ जा रहा है। इसी प्रकार पशुओं का भी हाल है। पालतू पशु को लोग छांव में रख रहे हैं। उन्हें हरा चारा के साथ दाना, भूसा और पानी दिया जाता है, जबकि, छुट्टा पशु जहां पहुंचते हैं, उन्हें पानी, चारा देने के बजाय लोग डंडा मारकर भगाते हैं। अगर छांव में बैठने की कोशिश करते हैं तो भगाया जाता है। इस वजह से भूख, गर्मी से चिड़िचिड़ा हो जाते हैं, फिर सामने वाले पर टूट पड़ते हैं। यही कुत्तों के साथ है, गर्मी में उनकी मानसिक स्थिति पहले से सही नहीं रहती है। ऐसे में भूख और पानी न मिलने से बेचैन हो जाते हैं। इसलिए कहीं खाने के लिए तो कहीं अन्य कारण से काटने के लिए दौड़ पड़ते हैं। गर्मी में इनसे दूर रहने की जरूरत है।

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गर्मी में रखें इन बातों का ध्यान
-बच्चों को अकेले न छोड़ें
- बुजुर्ग के साथ जाएं
- पशु को घर के सामने भगाए नहीं
- घर के सामने पानी जरूर रख दें
- कुत्ते को बचा हुआ खाना दें
- अनजान कुत्ते से बचें।
- कुत्ता काटने पर एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगवाएं
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हर साल बढ़ रहा जानवरों का इंसान पर हमला
आंकड़े बताते हैं कि, हालात काबू से बाहर होते जा रहे हैं। वर्ष 2022 में जहां कुत्ता, बिल्ली, बंदर और अन्य पशुओं के हमले के 15 हजार मामले सामने आए थे। वहीं, वर्ष 2025 तक यह संख्या 77 हजार थी। वर्ष 2026 की बात करें तो जनवरी से अबतक 35048 लोगों को मई माह एंटी रैबिज का इंजेक्शन लग चुका है। ये आंकड़े चाैंकाने वाले हैं।
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