उन्होंने आरोप लगाया कि सूचना देकर आधे घंटे तक इंतजार किया, लेकिन एंबुलेंस नहीं पहुंची। किसी तरह अस्पताल पहुंचे, वहां से रेफर करने के बाद एंबुलेंस को सूचना दी गई। एंबुलेंस कर्मियों ने देरी तो की ही, लापरवाही भी की, जिससे जान चली गई। एंबुलेंस सेवा के प्रोग्राम मैनेजर सौरव पांडेय ने कहा कि जीपीएस की नेटवर्किंग सिस्टम में खराबी के कारण एंबुलेंस में डीजल नहीं भरा जा सका होगा। एंबुलेंस को रिस्पांस टाइम में नहीं पहुंचने के मामले में वे स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। उधर, जोगिया पुलिस ने शव का पंचनामा करके पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। हादसा करने वाले कार चालक की तलाश की जा रही है। कोतवाल दिनेश सरोज ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है।
रिस्पांस टाइम 15 मिनट, पहुंची दो घंटे बाद
एंबुलेंस सेवा के संचालक के मुताबिक, कहीं से भी मिलने वाली सूचना पर 15 मिनट के अंदर एंबुलेंस को पहुंचने का नियम है। कभी-कभार पांच मिनट लेट भी हो जाता है। लेकिन, इस घटना की बात करें तो घोर लापरवाही सामने आई है। यहां सूचना देने के दो घंटे बाद एंबुलेंस जिला अस्पताल पहुंची।
परिजनों का बुरा हाल, गांव में मातम
मंगल गांव के पूर्व प्रधान संतराम के पिता थे। ग्राम पंचायत करौंदा मसिना में जब लोगों को पता चला कि पूर्व प्रधान के पिता की हादसे में मौत हो गई है, तो लोग उनके घर पर पहुंचने लगे। परिवार के लोगों को रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं गांव में मातम का माहौल छाया हुआ है। लोगों का कहना था कि मंगल बहुत ही अच्छे व्यक्ति थे।
सीएमओ प्रभारी डॉ. उजेर अतहर ने कहा कि एंबुलेंस का संचालन लखनऊ में बने कंट्रोल रूम से होता है। जब कोई शिकायत प्राप्त होती है तो जांच की जाती है। इस मामले में मरीज के परिवार के लोग शिकायत करेंगे, तो जांच की जाएगी।
दर्ज हो सकता है मुकदमा
अधिवक्ता संजय कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि एंबुलेंस सेवा की लापरवाही के मामले में मुकदमा दर्ज हो सकता है। घायल व्यक्ति की जान जाने के मामले में गंभीर धाराओं में आरोप साबित हो सकता है। टक्कर मारने वाले की तरह एंबुलेंस सेवा के जिम्मेदार भी दोषी साबित हो सकते हैं।