अमरगढ़ के वीर सपूतों को उनकी शहादत का सिला आज तक नहीं मिल पाया है। हालांकि, अमरगढ़ के शहीदों को उनकी पहचान और सम्मान दिलाने के लिए पिछले 3 वर्षों से पूर्व विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह के प्रयास से शहीद स्मारक बनवाने के साथ ही अमरगढ़ शहीद स्थल पर तीन दिवसीय अमरगढ़ महोत्सव और शहीद सम्मान यात्रा निकालकर अमरगढ़ की वीर गाथा को लोगों को बताने के साथ ही इसे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा हैlअमरगढ़ शहीद स्थल के निकट तालाब जहां पर निर्दोष भारतीयों को अंग्रेजों ने शहीद करके उनकी लाश पानी में फेंक दी थी।
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शहीद स्थल पर निर्मित होना है भव्य स्मारक
1858 के स्वतंत्रता संग्राम में अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर सपूतों की याद में पूर्व विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह के प्रयास से डुमरियागंज परिवहन बस स्टैंड से माली मैंनहा को जोड़ने वाली दो लेन की सड़क बनेगी, जो शहीद स्थल से होकर गुजरेगी। शहीद स्थल पर सजीव पत्थरों पर चित्रकारी एवं प्रतिमाओं की शक्ल में उकेरा जाएगा।
एक प्लेनेटोरियम बनेगा, जहां नक्षत्रशाला होगी और शहीदों को नमन करने के साथ खगोल दृश्य दिखाए जाएंगे। 101 फीट ऊंचाई पर तिरंगा झंडा, मशाल तथा शहीदों की याद में विशाल स्मारक बनेगा। योग केंद्र, जिम, बच्चों के लिए पार्क, झूला आदि बनेगा। विभिन्न जगह पांच गेट बनेंगे जो शहीदों की याद दिलाएंगे। जिसमें कई जगह गेट का निर्माण भी हो चुका है।