इटवा। इटवा और डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के किसानों की सुविधाओं के लिए स्थापित शाहपुर मंडी खाद्यान्न माफियाओं के निशाने पर है। राजस्व के मामले में कभी प्रदेश में 16वें स्थान पर रही इस मंडी पर कालाबाजारियों की ऐसी गिद्ध दृष्टि बनी है कि लगातार राजस्व का घाटा बढ़ता जा रहा है। इसे रोकने के लिए जब भी किसी ने प्रयास किया, हमले और दुश्वारियों का शिकार हुआ। ताजा मामला भी इससे जुड़ा है।
जानकार बताते हैं कि मौजूदा मंडी सचिव ने कार्यभार संभालने के बाद से ही मंडी शुल्क की चोरियों को रोकने के लिए प्रयास शुरू कर दिए है। नतीजा वह कालाबाजारियों के निशाने पर थे। गुरुवार की रात सचिव पर उनके आवास पर घुसकर कर हमले का मामला भी मंडी शुल्क की चोरी से जुड़ा हुआ है। यह लोग इतने दुस्साहसी थे कि कुछ ही दूरी पर पीएसी के मौजूद होने के बावजूद गेट पर सुरक्षा में लगे पीआरडी जवान से डंडा छीनकर सचिव की पिटाई की और अपने चार पहिया वाहन से चलते बने।
सूत्रों के मुताबिक इन व्यापारियों पर इसके पहले भी कई मुकदमे दर्ज हैं। वर्ष 2012-13 में एक मुकदमा शोहरतगढ़ थाने में तत्कालीन एसओजी प्रभारी लालजी यादव ने दर्ज कराया था। इसी वर्ष 2012-13 में मंडी सहायक दिनेश कुमार तिवारी की पिटाई इन्हीं व्यापारियो ने की थी, जिसका मुकदमा इटवा थाने में दर्ज हुआ था। मई 2015 में तत्कालीन मंडी सचिव विकास वर्मा ने भी एक मुकदमा इन्हीं व्यापारियों के खिलाफ इटवा थाने में दर्ज कराया था। अब गुरुवार की रात की घटना में फिर से इनका नाम सामने आया है।