हापुड़ की घटना के विरोध में आंदोलनरत हैं अधिवक्ता, प्रशासन व सरकार के खिलाफ की नारेबाजी
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। हापुड़ की घटना के विरोध में अधिवक्ताओं ने जनपद न्यायालय गेट पर प्रदर्शन किया। साथ ही उन्होंने शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत का बहिष्कार भी किया। बार कौंसिल के आह्वान पर आंदोलनरत अधिवक्ताओं ने सिविल सिद्धार्थ बार एसोसिएशन के बैनर तले राष्ट्रीय लोक अदालत का बहिष्कार किया। उन्होंने कोर्ट गेट पर प्रदर्शन कर पुलिस प्रशासन व सरकार के विरोध में नारेबाजी की।
सिविल सिद्धार्थ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राधेश्याम मिश्रा का कहना था कि हापुड़ की घटना निंदनीय है। अधिवक्ताओं की मांग जायज है। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। यदि कार्रवाई की गई होती तो अधिवक्ताओं को आंदोलन करने की नौबत नहीं आती। दोषी पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों को बर्खास्त किया जाना चाहिए।
एसोसिएशन के महामंत्री सिद्धनाथ पांडेय ने बताया कि बार कौंसिल के निर्देशानुसार कार्यकारिणी की सर्वसम्मति से शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत के बहिष्कार का निर्णय लिया गया। समस्त अधिवक्ताओं ने एकत्रित होकर लोक अदालत का बहिष्कार करते हुए अधिवक्ताओं के संरक्षण एवं सुरक्षा के लिए एडवोकेट प्रोटेक्टेशन एक्ट लागू करने, पीड़ितों को मुआवजा देने आदि मांग की। अधिवक्ताओं ने सरकार के नकारात्मक रवैये के खिलाफ पुलिस, प्रशासन एवं सरकार के विरुद्ध नारेबाजी कर न्यायालय गेट पर प्रदर्शन करने लगे और नारेबाजी करने। अधिवक्ताओं का यह प्रदर्शन पूरे दिन न्यायालय कार्यावधि तक चलता रहा और न्यायाधीशों के न्यायालय से जाने तक चला।
पूर्व अध्यक्ष अखंड प्रताप सिंह ने कहा कि पुलिस ने हापुड़ समेत प्रदेश के विभिन्न जिलाें में अधिवक्ताओं का उत्पीड़न किया है। राज्य सरकार दोषी पुलिस कर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई करने से कतरा रही है, जब तक अधिवक्ताओं को न्याय नहीं मिल जाता, आंदोलन जारी रहेगा।
धरने के दौरान अधिवक्ता कृपाशंकर त्रिपाठी व दिव्य प्रकाश शुक्ल ने सरकार, पुलिस व प्रशासन के तानाशाहीपूर्ण रवैये की भर्त्सना करते हुए अधिवक्ताओं की मांगों पर अविलंब अमल करने को कहा। इस दौरान अध्यक्ष राधेश्याम मिश्र, पूर्व अध्यक्ष रामशंकर पांडेय, इंदु कुमार सिंह, कन्हैया पांडेय, देवेंद्र मणि त्रिपाठी, राकेश सिंह, सरफराज मलिक, हरिप्रसाद दुबे, चंद्रकांत दुबे मौजूद रहे।
गेट में घुसने से रोका, एक लाख से अधिक केस निस्तारित
आंदोलन के दौरान अधिवक्ताओं ने जनपद न्यायालय का गेट बंद कर प्रदर्शन किया। इसके बाद वह गेट खोल दिए, लेकिन गेट पर बैठ कर प्रदर्शन करते रहे और किसी को भी प्रवेश करने से रोकते नजर आए। इससे वादकारियों के साथ ही बैंक कर्मी, बिजली कर्मी सहित किसी विभाग के कर्मचारी और अधिकारी न्यायालय में प्रवेश नहीं कर सकें। जिससे आयोजन स्थल पर कुर्सियां एवं मेज खाली रहे। वहीं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पूर्णकालिक सचिव एडीजे ब्रिजेश कुमार की तरफ से जारी विज्ञाप्ति में जिले के विभिन्न न्यायालयों में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में 107461 मुकदमों का निस्तारण बताया गया है। उन्होंने बताया है कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष जनपद न्यायाधीश संजय कुमार मलिक की अध्यक्षता में आयोजित लोक अदालत में अर्थदंड एवं सेटलमेंट धनराशि के रूप में 7,21,77,411 रुपये वसूले एवं दिलाए गए।