सिद्धार्थनगर। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में लक्ष्य के अनुरूप प्रगति न होने पर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी शिव शरणप्पा जीएन ने जिले के चार बाल विकास परियोजना अधिकारियों (सीडीपीओ) को कार्य में लापरवाही, शिथिल निगरानी और निर्देशों की अनदेखी के चलते प्रतिकूल प्रविष्टि दी है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि तीन दिन के भीतर सुधार नहीं होने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
जिलाधिकारी कार्यालय से जारी आदेश के अनुसार, जिन अधिकारियों को प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई है, उनमें आनंद प्रकाश श्रीवास्तव (बाल विकास परियोजना अधिकारी, बांसी/बाजार), गौरी शंकर यादव (बाल विकास परियोजना अधिकारी, नौगढ़ गोपाल सिंह (बाल विकास परियोजना अधिकारी, जोगिया) और मंजुलता गौतम (बाल विकास परियोजना अधिकारी, इटवा) शामिल हैं।
प्रशासनिक समीक्षा में सामने आया कि इन चारों परियोजनाओं में योजना की प्रगति बेहद धीमी है और लक्ष्य के सापेक्ष उपलब्धि काफी कम रही है। नौगढ़ में 1362 के लक्ष्य के सापेक्ष केवल 285 लाभार्थियों का पंजीकरण हुआ है, जो करीब 20.93 प्रतिशत है। बांसी क्षेत्र में 1774 के लक्ष्य के मुकाबले 340 पंजीकरण (19.17 प्रतिशत), जोगिया में 1322 के लक्ष्य के सापेक्ष 245 पंजीकरण (18.53 प्रतिशत) और इटवा में 1885 के लक्ष्य के मुकाबले मात्र 223 पंजीकरण (11.83 प्रतिशत) ही हो सका है। इन आंकड़ों को शासन द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप न मानते हुए गंभीर लापरवाही की श्रेणी में रखा गया है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी की ओर से मार्च से अप्रैल के बीच कई बार कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे। इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों द्वारा योजना की प्रगति में अपेक्षित सुधार नहीं किया गया।
बैठकों में अधिकारियों को प्रतिदिन कम से कम 50 लाभार्थियों का पंजीकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन अधिकांश परियोजनाओं में यह लक्ष्य भी पूरा नहीं हो पाया। इसे अधिकारियों की कार्यप्रणाली में शिथिलता, लापरवाही और निगरानी की कमी का परिणाम माना गया है।
जिलाधिकारी ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि तीन दिन के भीतर योजना की प्रगति में स्पष्ट सुधार दिखना चाहिए। यदि ऐसा नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आरोप पत्र तैयार कर विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।