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Siddharthnagar News: आस्था से भी खिलवाड़ कर रहे मिलावटखोर

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शहर के दुकार में नवरात्र पर सजी हुई फलहार सामग्री। संवाद
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-मिलावटी खाने से अल्सर, पाइल्स, कैंसर व लीवर की हो रही बीमारी
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-नवरात्र के दिनों में तेज हो जाता है मिलावट का खेल, बिगड़ रही सेहत
-शुद्धता की कमी के साथ व्रत भी हो रहा खंडित, सेंधा नमक में भी हो रही मिलावट
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। मिलावटखोरों ने अब नवरात्र में खाए जाने वाले खाद्य पदार्थों में भी मिलावट करना शुरू कर दिया है। इससे व्रत रखने वाले लोगों का जहां व्रत खंडित हो रहा है, वहीं मिलावटी खाद्य पदार्थ के खाने से अल्सर, पाइल्स, कैंसर व लीवर जैसे गंभीर रोग भी हो रहे हैं। मिलावटखोरों के खिलाफ खाद्य विभाग कार्रवाई भी कर रहा है। खाद्य विभाग ने कार्रवाई करते हुए फरवरी में विभिन्न दुकानों से कुटटू आटा सहित व्रत में खाए जाने वाले 28 खाद्य पदार्थ के नमूने लिए। जिनकी रिपोर्ट अभी नहीं आई है।विभाग रिपोर्ट मिलने के बाद संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई की तैयारी में है।
मिलावटखोर पुरानी खाद्य सामग्री को भी नई पैकिंग में बेच रहे हैं। यह खेल सबसे ज्यादा सिंघाड़े और कुटटू के आटा में की जा रही है। सावधानी न बरतने पर पैकिंग वाले अन्य फलाहार भी सेहत बिगाड़ सकते हैं। नवरात्र में सबसे ज्यादा बिक्री सिंघाड़े और कुटटू के आटा की होती है। इसके साथ साबूदाना, मूंगफली, देशी घी जैसे सामग्री की भी मांग बढ़ जाती है, लेकिन सिंघाड़ा और कुटटू के आटा में खतरनाक खेल हो रहा है। मुनाफे के लिए आटे में अरारोट और चावल को पीस कर मिलाया जा रहा है। शुद्ध सिंघाड़ा और कुटटू का आटा 140 रुपये किलो बिक रहा है। इसकी आड़ में मिलावटखोर अरारोट और पिसा चावल मिलाकर ग्राहकों को बेचकर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। देशी घी में मिलावट का खेल बड़े पैमाने पर हो रहा है। कई छोटी-छोटी कंपनियों की पन्नी और डिब्बे में 100 से 200 ग्राम की पैकिंग में देशी घी बाजार में उपलब्ध है। इन गुमनाम कंपनियों की पैकिंग में देशी घी वाली खुशबू भी नहीं रहती। जबरदस्त गर्मी के बावजूद यह देशी घी जमा रहता है, जबकि शुद्ध देशी घी गर्मी में अपने आप पिघल जाता है।
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खाद्य विभाग के अधिकारियाें के अनुसार नकली साबूदाना बनाने में सोडियम हाइपोक्लोराइट, कैल्शियम सल्फ्यूरिक एसिड, हाइपोक्लोराइट, ब्लीचिंग एजेंट और फॉस्फोरिक एसिड जैसे केमिकल्स का इस्तेमाल होता है। ऐसे में इन्हें खाना सेहत के लिए नुकसानदेह है और पेट में इंफेक्शन का कारण बन सकता है।
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गूंथकर करें पहचान
जिस कुटटू के आते को खा रहे हैं वो मिलावटी है या शुद्ध, इसकी जांच करने के लिए इसे थोड़ा सा गूंथकर भी पता लगाया जा सकता है। दरअसल कुटटू का आटा आसानी से गूंथा जा सकता है। अगर इसे गूंथने पर ये बिखर जाता है तो समझ जाएं कि इसमें किसी न किसी चीज की मिलावट जरूर की गई है।
-नरेंद्र प्रताप सिंह, खाद्य विभाग

पानी डालकर करें पहचान
कुटटू के आटे की शुद्धता की जांच करने का एक तरीका यह भी है कि आप इसे पानी में डालकर चेक करें। इसके लिए एक कांच के गिलास में पानी लेकर उसमें कुटटू का आटा डाल दें। अगर आटा पानी में तैरता रहे तो समझ जाएं कि इसमें मिलावट हुई है, जबकि अगर आटा पूरी तरह शुद्ध है तो वो अपने आप ही सतह पर बैठ जाएगा।

कैसे करें पहचान
-पैकेट बंद सिंघाड़ा या कुटटू का आटा खरीदते समय पैकेट के सील की ठीक ढंग से परखें
-सिंघाड़ा और कुटटू का शुद्ध आटा पीलापन लिए होता है
-मिलावट वाला सिंघाड़ा और कुटटू का आटा सफेद होता है
-खराब और मिलावटी आटा गूंथते समय लसलसा हो जाता है, उसमें से अजीब गंध आती है
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खाद्य विभाग की कार्रवाई
खाद्य विभाग के अधिकारियाें ने फरवरी तक दूध के 37, मिल्क मिठाई के 45, घी के चार, सरसों तेल के सात, अन्य खाद्य के 14, वनस्पति के तीन, ड्राई फ्रूट के 18, कुटटू आटा सहित अन्य व्रत वाले खाद्य पदार्थ के 28, बेसन मैदा की मिठाई के 15 व नमकीन के 19 सेंपल लिए हैं, जबकि एडीएम के पास दूध के 23, घी के दो, दूध की मिठाई के 24, तेल के 10 वाद दायर हैं। इसके खिलाफ कार्रवाई होनी है। वहीं दूध में तीन लाख 58 हजार, दूध की मिठाई में तीन लाख 40 हजार, खाद्यान में एक लाख 29 हजार का जुर्माना लगाया गया है।
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बोले विशेषज्ञ
कई प्रकार से बनाया गया मिलावटी देसी घी लोगों के स्वास्थ्य पर खराब असर डालता है। मिलावटी देसी घी की खास पहचान यह है कि लगभग दो सप्ताह बाद इसकी खुशबू कम होने के साथ-साथ स्वाद भी बदल जाता है। नकली देश घी लोगों के पेट तथा फेफड़ों के साथ-साथ हृदय पर भी नकारात्मक असर डालता है। इसका सेवन करने से दमा, खांसी जैसी कई बीमारियां हो सकती है।
-डॉ. सीबी चौधरी, चेस्ट रोग विशेषज्ञ

मिलावट की हुई कोई भी खाद्य पदार्थ सेहत के लिए फायदेमंद नहीं है। इससे लोगों को अल्सर, पाइल्स, कैंसर व लीवर संबंधित बीमारी हो सकती है, जबकि मौसम में बदलाव होने से फूड प्वाइजनिंग की भी समस्या रहती है। इससे बचने के लिए नवरात्र व्रत के समय हल्का पेय पदार्थ ले, जिससे व्रत खंडित होने से बच जाएगा, जबकि सेहत के लिए भी लाभदायक होगा।
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-डॉ. गौरव दुबे, विभागाध्यक्ष मेडिसिन विभाग

वर्जन
खाद्य पदार्थों का निरीक्षण किया जा रहा है। कुट्टू के आटा का भी सेंपल लिया गया है। अधोमानक मिलने पर संबंधित दुकानदार के खिलाफ कार्रवाई भी कि जा रही है। यदि कोई भी व्यक्ति मिलावट करते हुए पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-आरएल यादय, उपायुक्त खाद्य सुरक्षा
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