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Siddharthnagar News: मिलावटी खोआ से तैयार हो रहा ‘गिफ्ट पैक’, 80 किलो खोआ और मिठाई नष्ट कराई

Wed, 25 Feb 2026 11:38 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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सिद्धार्थनगर। अगर आप इस होली पर गिफ्ट देने या घर लाने के लिए बाजार से रेडीमेड गुझिया खरीदने जा रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। आकर्षक डिब्बों में सजी ये गुझिया हर बार शुद्ध और सुरक्षित नहीं होती। शहर और आसपास के इलाकों में खराब मेवा, सिंथेटिक खोआ और कई बार बासी सामग्री से गुझिया तैयार कर धड़ल्ले से बेची जा रही है। दिखने में सुंदर और सस्ती ये गुझिया आपकी सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में बुधवार को भी मिलावटी खोआ की खेप पकड़ी गई। वहीं, ढाई क्विंटल दूषित मिठाई नष्ट कराई।
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होली पर्व के दृष्टिगत मिलावटी खाद्य और पेय पदार्थों की बिक्री पर प्रभावी रोकथाम के लिए बुधवार को जांच कराई गई। खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने अभियान के दौरान धानी रोड, मंगल बाजार, बांसी से एक खोआ और एक मिल्क केक का नमूना संग्रहीत किया गया। इसके अलावा 80 किलोग्राम खोआ और 265 किलोग्राम दूषित मिठाई अस्वच्छ परिस्थितियों में भंडारित पाए जाने पर नष्ट करा दी गई। अभियान में सहायक आयुक्त (खाद्य) आरएल यादव के साथ मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी नरेंद्र प्रताप सिंह, खाद्य सुरक्षा अधिकारी हीरा लाल, नीरज कुमार चौधरी और रंजन कुमार श्रीवास्तव भी शामिल रहे।
होली से पहले बाजार में गुझिया की मांग अचानक बढ़ गई है। जिले के मुख्यालय नौगढ़, बांसी, डुमरियागंज, इटवा आदि तहसील मुख्यालयों की प्रमुख बाजारों और मिठाई की दुकानों पर 300 से 600 रुपये प्रति किलो तक के आकर्षक गिफ्ट पैक उपलब्ध हैं। पड़ताल में पाया गया कि थोक बाजार में बिना ब्रांड की गुझिया खुले कार्टन में सप्लाई हो रही है। एक दुकानदार ने ऑफ रिकॉर्ड माना कि मुनाफा कम होने की वजह से सस्ता माल लेना पड़ता है। दुकानदारों के अनुसार, अब लोग घर पर बनाने के बजाय रेडीमेड गुझिया को ही प्राथमिकता दे रहे हैं। इस बढ़ती मांग ने स्थानीय स्तर पर अस्थायी उत्पादन यूनिटों को बढ़ावा दिया है, जहां गुणवत्ता और स्वच्छता के मानकों की अनदेखी की जा रही है।
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पड़ताल में सामने आया है कि कई जगह लागत कम करने के लिए घटिया और सस्ते कच्चे माल का उपयोग किया जा रहा है। थोक बाजार से टूटे और नमी वाले मेवे खरीदे जा रहे हैं, जबकि महंगे शुद्ध मावा की जगह सिंथेटिक खोआ इस्तेमाल किया जा रहा है। तैयार गुझिया को आकर्षक पैकिंग में रखकर ब्रांडेड उत्पाद के रूप में बेचा जा रहा है, जिससे उपभोक्ता भ्रमित हो जाते हैं। शहर के एक ग्राहक राजेश गुप्ता ने बताया, पिछले साल बाजार से गिफ्ट पैक खरीदा था। खाने के बाद बच्चों को पेट दर्द और उल्टी की शिकायत हुई। डॉक्टर ने बाहर की मिठाई खाने से बचने की सलाह दी। अब हम बिना भरोसे के कहीं से मिठाई नहीं लेते।
सिद्धार्थनगर में खाद्य सुरक्षा विभाग ने हाल ही में कई दुकानों और यूनिटों से सैंपल लिए हैं। अधिकारियों के अनुसार, कुछ पैक्ड गुझिया में लाइसेंस नंबर, निर्माण तिथि और सामग्री का पूरा विवरण नहीं मिला। यह सीधे तौर पर भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण के नियमों का उल्लंघन है। उत्पादन या बिक्री पर स्थायी रोक की कार्रवाई कम ही होती है। इससे मिलावट करने वालों में कार्रवाई का डर कम हो गया है।

- डॉक्टरों के अनुसार, मिलावटी खोआ और खराब मेवा से बनी मिठाइयां सेहत के लिए बेहद खतरनाक हो सकती हैं। फिजिशियन डॉ. आरके सिंह ने बताया, सिंथेटिक और बासी सामग्री से बनी गुझिया खाने से फूड प्वाइजनिंग, उल्टी, दस्त और पेट संक्रमण का खतरा रहता है। कई मामलों में मरीजों को अस्पताल में भर्ती तक करना पड़ता है।
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सस्ता बनाने के लिए खतरनाक विकल्प
- मिठाई कारोबार से जुड़े लोगों के अनुसार असली खोआ और अच्छी गुणवत्ता के मेवे महंगे होते हैं। ऐसे में कई छोटे निर्माता लागत कम करने के लिए सिंथेटिक खोआ, खराब या पुराने मेवे और सस्ते विकल्पों का इस्तेमाल करते हैं। इससे उत्पादन लागत कम हो जाती है और मुनाफा बढ़ जाता है। एक स्थानीय मिठाई कारोबारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि असली खोआ महंगा है। कुछ लोग पाउडर और सिंथेटिक सामग्री से खोया जैसा मिश्रण तैयार कर लेते हैं। ग्राहक पैक देखकर खरीद लेते हैं, अंदर की गुणवत्ता जांच नहीं पाते।

ऐसे बन रही गुझिया
- शहर के कई बड़े प्रतिष्ठानों से लेकर छोटी दुकानों पर इन दिनों धड़ल्ले से गुझिया तैयार की जा रही है। सूत्र बताते हैं कि यहां सस्ते मेवे और संदिग्ध खोआ का उपयोग किया जा रहा था। तैयार गुझिया को प्लास्टिक ट्रे में रखकर गिफ्ट बॉक्स में पैक किया जा रहा था। स्थानीय लोगों ने बताया कि इस तरह की यूनिट हर साल होली से पहले ही सक्रिय होती हैं।

ऐसे पहचानें सुरक्षित गुझिया
- पैक पर लाइसेंस नंबर और निर्माण तिथि जरूर देखें
- बहुत कम कीमत वाले उत्पाद से सावधान रहें
- खुली और बिना लेबल वाली गुझिया न खरीदें
- गंध, रंग या स्वाद संदिग्ध लगे तो न खाएं
- विश्वसनीय दुकानों से ही खरीदारी करें

कोट...
- त्योहार को देखते हुए लगातार जांच अभियान चलाया जा रहा है। बिना लाइसेंस और मानक के विपरीत उत्पाद बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सैंपल फेल होने पर जुर्माना और अन्य कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।
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- आरएल यादव, सहायक आयुक्त (खाद्य)
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