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Siddharthnagar Flood: तब बाढ़ के जख्म छिपाएंगे, तो राहत कैसे लगाएंगे

Sat, 22 Oct 2022 01:03 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर।

सार

बाढ़ पीड़ितों में प्रशासनिक अमले को लेकर आक्रोश बढ़ा तो सत्ताधारी दल के नेताओं ने अधिकारियों के पेच कसे, जिसके बाद पूरी मशीनरी हरकत में आई। बाढ़ के शुरुआती दिनों में राहत और बचाव कार्य में बरती गई लापरवाही का नतीजा रहा कि बांध-पर-बांध टूटते गए और तेज बहाव की जद में आने वाले सैकड़ों गांवों में सब कुछ तबाह हो गया।
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भनवापुर क्षेत्र के पेंड़रा गांव के निवासी भरथू के घर में भरा बाढ़ का पानी। संवाद - फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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विस्तार
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सिद्धार्थनगर जिले में बाढ़ की त्रासदी के दौरान राहत व बचाव कार्य पर उठ रहे सवालों के बीच अब प्रशासनिक अमला आंकड़ों की बाजीगरी कर अपना गिरेबान बचाने में जुट गया है। जब नुकसान के आंकड़े ही कम बताए जाएंगे, सबको राहत कैसे दे पाएंगे। नदियों में आए उफान और बांध टूटने से जिले की करीब एक तिहाई आबादी प्रभावित हुई।
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17 लोगों की जान चली गई, घरों में रखा सामान व अनाज बाढ़ की भेंट चढ़ गया और खेतों में खड़ी फसल तबाह हो गई। लेकिन, प्रशासन के आंकड़ों में जिले के केवल 566 गांव प्रभावित, 380 गांव मैरुंड और साढ़े चार लाख आबादी ही बाढ़ की चपेट में बताई गई है। जबकि जमीनी हकीकत इन आंकड़ों से इतर है। पुराने सारे रिकॉर्ड को ध्वस्त कर राप्ती, बूढ़ी राप्ती और बाणगंगा नदियों ने इस बार जम कर तबाही मचाई। अक्तूूबर में बाढ़ की आशंका से बेखबर रहे प्रशासन को अचानक आई इस आपदा से निपटने में पसीना छूट गया।

बाढ़ पीड़ितों में प्रशासनिक अमले को लेकर आक्रोश बढ़ा तो सत्ताधारी दल के नेताओं ने अधिकारियों के पेच कसे, जिसके बाद पूरी मशीनरी हरकत में आई। बाढ़ के शुरुआती दिनों में राहत और बचाव कार्य में बरती गई लापरवाही का नतीजा रहा कि बांध-पर-बांध टूटते गए और तेज बहाव की जद में आने वाले सैकड़ों गांवों में सब कुछ तबाह हो गया। लोगों को घरों से सामान निकालने तक का मौका नहीं मिला और वह किसी तरह से जान बचाकर भागते नजर आए।
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जिले में बाढ़ की त्रासदी इस कदर थी कि सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ जलशक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह तक को यहां के हालात का जायजा लेने आना पड़ा। राहत और बचाव कार्य पर उठ रहे सवालों के बीच अब प्रशासन आंकड़ों को कम दिखा कर अपनी कमियों को छिपाने में लगा है।

जिले की आबादी करीब 30 लाख है, जिनमें से 90 प्रतिशत आबादी गांवों में बसती है। एक अनुमान के मुताबिक, जिले के कुुल 2383 गांवों में से आठ सौ से अधिक गांव बाढ़ की जद में आए और सात-आठ लाख की आबादी प्रभावित हुई। इन प्रभावित गांवों में घरों तक पानी पहुंचा और लोगों का काफी नुकसान हुआ। वहीं बाढ़ प्रभावित अधिकतर लोगों के घरों में रखा सारा सामान और अनाज बर्बाद हो गया। लहलहा रही धान की फसल इस कदर चौपट हुई कि अब छटांक भर पैदावार की गुंजाइश नहीं बची है। दस दिनों तक पूरी तरह से फसल डूबी रही। जब पानी हटा तो अन्नदाता की सारी मेहनत और पूंजी, सैलाब की भेंट चढ़ चुकी है। कई जगहों पर तो अब भी खेतों से पानी नहीं हटा और फसल डूबी हुई है।

हालांकि सरकारी महकमे ने फसलों के नुकसान का आंकड़ा जारी नहीं किया और अभी वह सर्वे में जुटा हुआ है। तबाह हुए लोग शासन-प्रशसन की ओर आशा भरी निगाहों से देख रहे हैं। लोगों का कहना है कि पीड़ितों को मदद पहुंचाने की जरूरत है। इस संबंध में डीएम संजीव रंजन ने बताया कि जहां के ग्रामीण शिकायत कर रहे हैं, उन गांवों की जांच कराई जाएगी। यदि गांव बाढ़ प्रभावित मिला तो पीड़ितों को सरकारी सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी।

गांवों को बाढ़ प्रभावित कराने को प्रधानों ने लिखा पत्र
प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित एवं मैरुंड गांवों की सूची सार्वजनिक नहीं की है। आंकड़े के अनुसार, 566 गांवों की 4.46 लाख आबादी बाढ़ की चपेट में आई है, लेकिन कई प्रधानों को ही नहीं पता है कि उनके गांव के नाम प्रभावितों की सूची में है या नहीं। डुमरियागंज में 53 गांव बाढ़ प्रभावित हैं और 85 गांव मैरुंड घोषित किए गए हैं। भनवापुर क्षेत्र के पड़िया, बिजुरा, चैनिया, गनवरिया खुर्द, गनवरिया बुजुर्ग, मन्नीजोत,कठौतिया किशुन, पेड़रा और मंगराव गांवों के घरों में पानी भरा था। इन गांवों को बाढ़ प्रभावित की सूची में नहीं दर्ज किया। क्षेत्र के प्रधान प्रतिनिधि अशोक चौरसिया, डॉ. कमलेश मिश्रा, प्रधान रुकमणि देवी एवं रामविलास सहित कई प्रधानों ने एसडीएम को पत्र लिखकर गांव को बाढ़ प्रभावित सूची में शामिल करने की मांग की है।

प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित गांवों की सूची नहीं उपलब्ध कराई है, सूची तहसील परिसर में भी नहीं चस्पा है। जिन गांवों में बाढ़ प्रभावितों को राहत सामग्री नहीं मिली है, उन्हें राहत दिलाने के लिए मैंने एसडीएम को फोन किया है। जिन गांवों में पानी भरा है, वहां अब तक तबाही का निशान भी नहीं मिटा है। सभी पीड़ितों को राहत सामग्री नहीं मिली है। राहत सामग्री बांटने में भी मनमानी की जा रही है, जो पीड़ित है, उसे राहत जरूर मिलनी चाहिए। -माता प्रसाद पांडेय, विधायक इटवा

बाढ़ प्रभावितों की सूची सार्वजनिक होनी चाहिए। विधान सभा क्षेत्र के सभी बाढ़ प्रभावित गांवों में राहत सामग्री वितरित करने के लिए मैंने जिलाधिकारी को पत्र भेजा है। बाढ़ में डूब गए गांवों के लोग शिकायत कर रहे हैं तो मैं जिला प्रशासन को अवगत करा रहा हूं। जिनका घर डूब गया है, उन्हें रहने, खाने का ठिकाना नहीं है। मैंने सभी प्रभावित गांवों में दौरा करके तबाही देखी है। -विनय वर्मा, विधायक, शोहरतगढ़
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