शोहरतगढ़। तहसील में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने प्रशासनिक ढिलाई पर कड़ा रुख अपनाया। गलत आख्या देने पर कानूनगो के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए। वहीं, लंबित फाइलों, अनुपस्थित अधिकारियों और शिकायत निस्तारण में देरी पर भी सख्त चेतावनी दी गई। उपकृषि निदेशक, सिंचाई, ड्रेनेज, लीडबैंक व नहर खंड के अधिकारी अनुपस्थित रहे। सभी से स्पष्टीकरण तलब करने के निर्देश दिए गए हैं।
शासन के निर्देशानुसार प्रत्येक माह के प्रथम और तृतीय शनिवार को आयोजित होने वाले संपूर्ण समाधान दिवस के तहत शनिवार को तहसील शोहरतगढ़ में जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन और पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक महाजन की अध्यक्षता में जनसुनवाई हुई। इस दौरान राजस्व, विकास, शिक्षा, पूर्ति और अन्य विभागों से जुड़ी कुल 47 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें 44 मामले राजस्व विभाग से संबंधित थे। मौके पर ही 6 राजस्व मामलों का निस्तारण कर दिया गया जबकि शेष शिकायतों को तीन दिन के भीतर गुणवत्तापूर्ण ढंग से निपटाने के निर्देश दिए गए।
कार्यक्रम के दौरान एक फरियादी की शिकायत पर गलत आख्या प्रस्तुत करने के मामले में सदर राजस्व निरीक्षक अवधेश के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए। वहीं, आवासीय पट्टे की फाइल दबाए रखने पर नाजिर प्रदीप कुमार को कड़ी फटकार लगाई गई। धारा-24 के मामलों में प्रगति न होने पर डीएम ने नाराजगी जताते हुए तहसीलदार को फटकार लगाई और लंबित फाइलों को तत्काल निस्तारित करने का निर्देश दिए। मालबाबू की ओर से फाइलों के हस्ताक्षर में देरी का कारण तहसीलदार स्तर पर अटकने की बात सामने आने पर डीएम ने स्पष्ट कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। फौजदारी बाबू की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे, जिस पर जल्द कार्रवाई के संकेत दिए गए।
डीएम ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि आईजीआरएस और तहसील दिवस में प्राप्त शिकायतों का समयबद्ध और पारदर्शी निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। जांच के दौरान शिकायतकर्ता और विपक्षी दोनों की मौजूदगी में निष्पक्ष कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।