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Siddharthnagar News: अभ्युदय के छात्रों को नहीं मिल पाएगी प्रोजेक्टर की सुविधा

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- बुद्ध विद्यापीठ व बांसी के रतन सेन में आयोजित होती है अभ्युदय के तहत निशुल्क पढ़ाई
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- दो वर्ष पहले ही आया था प्रोजेक्टर लगाने का पैसा, कोर्स कोऑर्डिनेटर ने भी नहीं दिया ध्यान

संवाद न्यूज एजेंसी

सिद्धार्थनगर। शहर के बुद्ध विद्यापीठ व बांसी के रतन सेन इंटर कॉलेज में प्रतिदिन संचालित निशुल्क अभ्युदय कोचिंग के छात्रों को अब प्रोजेक्टर से पढ़ाई करने मौका नहीं मिलेगा। दो वर्ष पहले जिले में लगभग पांच लाख प्रोजेक्टर खरीदने के लिए बजट आया भी और वापस भी चला गया। इससे अब दोबारा बजट भी नहीं आने की उम्मीद है। न ही जिले में प्रोजेक्टर से पढ़ाई करने का मौका मिलेगा।

जिले में दो वर्ष पहले समाज कल्याण अधिकारी का अन्य जनपद में ट्रांसफर हो गया। लेकिन कोर्स कोऑर्डिनेटर ने भी छात्रों के हित के लिए प्रोजेक्टर खरीदने व लगवाने को लेकर कोई भी गंभीरता नहीं दिखाई। इससे अब जिले में निशुल्क अभ्युदय कोचिंग सेंटर में पढ़ाई करने वाले अभ्यर्थियों को प्रोजेक्टर से पढ़ाई का मौका नहीं मिल पाएगा। जबकि प्रोजेक्टर की सुविधा होने से लाइव प्रसारण भी किया जाता।
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इससे ब्लॉक मुख्यालय पर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्र उससे जुड़ पाते। सभी कक्षाएं निर्धारित समय से संचालित होती। इसके लिए एक्सपर्ट शिक्षक भी नियुक्त किए जाते, जिससे छात्र-छात्राएं ऑनलाइन माध्यम से भी पढ़ाई कर पातीं। जो छात्रों को समझने के लिए एक और बेहतर मौका देता। लेकिन जिले के सक्षम अधिकारियों की लापरवाही से प्रोजेक्टर का बजट आया और चला भी गया। लेकिन इसका लाभ जिले के अभ्यर्थियों को नहीं मिल पाया।



बस्ती में लगे हैं तीन प्रोजेक्टर

सिद्धार्थनगर। जिले में बजट आया और चला भी गया, जिससे प्रोजेक्टर की सुविधा से अभ्यर्थी वंचित रह गए। अधिकारियों के अनुसार प्रदेश के सभी जिले के अभ्युदय कोचिंग में प्रोजेक्टर लगाए गए हैं। वहीं जिले के मंडल बस्ती में तीन प्रोजेक्टर व संतकबीरनगर में एक प्रोजेक्टर लगाया गया हैं। इससे छात्र-छात्राएं प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करते हैं। संवाद
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वर्जन

जिले में संचालित अभ्युदय कोचिंग में प्रोजेक्टर खरीदने के लिए पांच लाख का बजट आया हमारे स्थानांतरण से पहले आया था, लेकिन वर्तमान में उसका उपयोग नहीं किया गया, जिससे वह वापस भी हो गया है। अब प्रोजेक्टर को लेकर पैसा आने की उम्मीद नहीं है।

-महिपाल सिंह, समाज कल्याण अधिकारी
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