फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Siddharthnagar News: सहालग में चमका कड़क नोटों का धंधा, रोजाना 7 से 8 लाख की खपत

Wed, 04 Dec 2024 11:47 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
विज्ञापन
शहर में बनी हुई नोटों की माला।
विज्ञापन
सिद्धार्थनगर। सहालग के सीजन में बाजारों में तेजी के साथ नए नोटों का धंधा भी शुरू हो गया। अधिक शादियों वाले दिन 7-8 लाख रुपये की नए नोट खप जा रहे हैं।
विज्ञापन

मांग इतनी है कि जिले में आवश्यकता पूरी नहीं होने पर इससे जुड़े धंधेबाज गोरखपुर और बस्ती से भी नोटों की गड्डी लेकर आ रहे हैं। मोटी कमीशन देकर नोट लाने वाले मामले की डेढ़ गुनी कीमत वसूल रहे हैं। यह धंधा इसलिए चमक रहा है कि बैंकों में लोगों को लाइन लगाने के बाद भी नए नोट नहीं मिल पा रही है।
शादियों की शहनाई के बीच बैंकों में नए नोटों की गड्डी की मांग बढ़ गई है, लेकिन बैंक अधिकारी नए नोट उपलब्ध न होने का कहकर खाताधारकों को लौटा रहे हैं। वहीं, बाजार में नोटों की माला, पूजा सामग्री और फूल बेचने वालों की दुकानों पर नए नोट पहुंच रहे हैं, जिससे बाजार में कालाबाजारी भी शुरू हो गई है।
विज्ञापन

एक अनुमान के मुताबिक जिले में हर दिन 300 से अधिक शादियां हो रही हैं और प्रत्येक शादी में औसतन 20-25 हजार रुपये के नए नोट की मांग रहती है, जबकि मांगलिक कार्यों में भी नए नोट की मांग रहती है।
सहालग में नोटों पर इस कदर महंगाई बढ़ी है कि 10 रुपये का नोट 14 रुपये का हो गया है। नोटाें का खेल इस कदर बढ़ गया है कि जितना छोटा नोट उतना ही अधिक कमीशन देना पड़ा है। सहालग के चलते नए नोटों की मांग भी बढ़ गई है। सभी नोट कई गुना महंगे दाम पर बिक रहे हैं। लोग नए नोटों को माला बनाने, शादी में देने, तिलक में चढ़ाने, उड़ाने सहित अन्य कई कार्यों के लिए नए नोटों की मांग बढ़ी है। इसका फायदा उठाते हुए कई लोगों बिचौलिया करके अपना धंधा चला रहे हैं।
शहर के एक माला व्यापारी ने बताया कि शादियों के सीजन में नए नोटों की मांग बढ़ गई है। जिले में कटे फटे नोटों को बदलने की व्यवस्था न होने से समस्या बढ़ गई है। इससे पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष नोटों के माला का दाम भी बढ़ाना पड़ रहा है।
माला की दुकान चलाने वाले ने बताया कि 10 के नोट की गड्डी पर 400, 20 रुपये की गड्डी पर 250 और 50 रुपये की गड्डी पर 300 रुपये वसूल रहे हैं, जबकि आरबीआई का सख्त निर्देश है कि कोई भी मुद्रा उसके तय मूल्य से ज्यादा पर खरीदी बेची नहीं जा सकती।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें