सिद्धार्थनगर। शिया मुसलमानों के चौथे इमाम हजरत जैनुल आब्दीन (सैयदे सज्जाद) के शहादत दिवस पर शनिवार को हल्लौर में गम और अकीदत का माहौल रहा। जगह-जगह मरसिया मजलिस आयोजित हुईं। ताजिया रखे गए और अकीदतमंदों ने नौहा पढ़कर मातम कर इमाम सज्जाद की शहादत को याद किया।
शुक्रवार रात हल्लौर स्थित इमामबाड़ा सेठ बाबा से अंजुमन उरूज मातम की ओर से अलम और ताबूत का जुलूस निकाला गया। वहीं, इमामबाड़ा हुसैनिया फहम साहब से अंजुमन गुंचा मातम का अलम-ताबूत जुलूस निकला। नौहा पढ़कर मातम करते हुए जुलूस कस्बे के प्रमुख मार्गों से होकर बब्बन बाबा के इमामबाड़े पर पहुंचकर समाप्त हुआ।
बब्बन बाबा के इमामबाड़े पर रखे गए ताजिया और सजाए गए इमाम सज्जाद के ताबूत की जियारत के लिए शुक्रवार रात से शनिवार तक अकीदतमंदों की भीड़ जुटी रही। लोगों ने नौहा-मातम कर इमाम सज्जाद की शहादत को याद किया।
शनिवार शाम करीब चार बजे ताजिया और अलम-ताबूत का मुख्य जुलूस निकाला गया। यह बड़े इमामबाड़ा, दरगाह हजरत अब्बास और जन्नतुलबकी होते हुए कर्बला पहुंचकर समाप्त हुआ।
जुलूस के दौरान कायनात, शकील गुड्डू, आरजू, मंजर मास्टर, खुलूस, नफीस हल्लौरी, आले रजा, लकी, नौशाद, हसन जमाल समेत अन्य लोगों ने नौहा पढ़ा, जिस पर अकीदतमंदों ने मातम किया।
मजलिस में इमाम सज्जाद की शहादत पर डाला प्रकाश : मौलाना शहकार हुसैन जैदी, जाकिर जमाल हैदर, हबीबुल हसन, अजीम हैदर और काजिम मेहंदी ने मजलिस में इमाम सज्जाद की शहादत पर रोशनी डाली।