सिद्धार्थनगर। रसोइयों के नाम पर मनरेगा में मजदूरी दिखाकर भुगतान कराना ग्राम प्रधान को महंगा पड़ सकता है। शिकायतकर्ता ने पहले आरटीआई से जानकारी निकाली, फिर कार्रवाई के लिए पुलिस के पास गया। शिकायत दर्ज न हुई तो वह न्यायालय पहुंचा। जहां शिकायतकर्ता का पक्ष सुनकर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पूरा प्रकरण गंभीर मानते हुए थानाध्यक्ष इटवा को एफआईआर दर्ज करके विवेचना के बाद आख्या न्यायालय को देने का आदेश दिया है।
मामला ग्राम पंचायत इटवा बक्शी का है। शिकायतकर्ता लौटूराम ने ग्राम प्रधान सत्यनरायन समेत अन्य के खिलाफ सरकारी धन के गोलमाल का आरोप लगाया। शिकायतकर्ता के वकील शिराज अहमद ने बताया कि पहले उनके मुवक्किल ने आरटीआई के जरिए जानकारी जुटाई कि ग्राम सभा में तैनात रसोइयों के नाम पर मनरेगा में मजदूरी निकाली गई है। फिर वह कार्रवाई के लिए पुलिस के पास गया। इस संबंध में उसने कई जगह शिकायत की लेकिन कार्रवाई नहीं हुई तो वह न्यायालय आया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दलीलें सुनकर इसे गंभीर माना। इस संबंध में उन्होंने थाना प्रभारी इटवा को एफआईआर दर्ज करके जांच आख्या न्यायालय को उपलब्ध कराने के लिए आदेशित किया है।