सिद्धार्थनगर। कपिलवस्तु महोत्सव के अंतिम दिन मंगलवार रात रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने लोगोें का मन मोह लिया। देर रात तक चले कार्यक्रम में लोकगीत, भोजपुरी गीत, हिंदी फिल्मी गीत और हास्य व्यंग की प्रस्तुति ने लोगों का मनोरंजन किया।
कपिलवस्तु महोत्सव अंतिम दिन 31 दिसंबर को शाम से ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों की छंटा बिखरनी शुरू हो गई। नया साल आने की रात होने के कारण जश्न में लोगों का उत्साह दोगुना था। कार्यक्रम में लोगों की भारी भीड़ जुटी हुई थी। राज्यपाल से पुरस्कार प्राप्त राकेश उपाध्याय जब मंच पर पहुंचे तो लोगों ने तालियां बजाकर स्वागत किया। उन्होंने कजरी के साथ कई गीत सुनाए। ‘रेलिया बैरन पिया को लिए जाए रे’ और ‘काहे किरिया धरावे लू आन की तरह, तुहके पुतरी में राखेली परान की तरह’ से श्रोताओं का मन मोह लिया। बनारस के गायक राजन तिवारी ने ‘गोरिया झूला पे झुलावा अपने यार के, सईयां के उतार के’ और धर्मेश दीक्षित ने ‘जब से हो गईली प्रधान, तबसे छूटल ओखली मूसल धान’ गीत प्रस्तुत कर लोगों का मनोरंजन किया। इसके बाद डॉ. शरदचंद्र त्रिपाठी ने शास्त्रीय संगीत ‘मोरा पिया मोसे बोलत नाही’प्रस्तुत किया।हास्य व्यंग्य कलाकार शाहबलाल धारी ऊर्फ इच्छाधारी ने वर्तमान में विवाह समारोहों के दौरान होने वाले कार्यक्रमों पर व्यंग्यात्मक प्रस्तुति कर लोगों को खूब हंसाया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के दौरान ही रात 12 बजने से पहले और बाद में लोगों ने नए साल का जोरदार स्वागत किया। इस दौरान लोगों ने डीजे की धुन पर जमकर डांस किया। यहां डीएम एसपी मिश्र, सीडीओ अखिलेश तिवारी, उप कृषि निदेशक डॉ. राजीव कुमार, डीएफओ पीएन सिंह आदि मौजूद रहे।