सिद्धार्थनगर। दो दिनों के मंथन के बाद पुलिस महकमे में बड़ा फेरबदल किया गया। शुक्रवार और शनिवार के बीच 33 दरोगाओं के कार्यक्षेत्रों में व्यापक फेरबदल हुआ। इस फेरबदल के बाद से ही पुलिस महकमे में चर्चाएं काफी तेज होने लगी हैं। अभी तक इतने बड़े बदलाव कभी नहीं किए गए थे। सूत्रों की माने राजनीतिक समीकरणाें को ध्यान में रखते हुए सभी लोगों को खुश करने की चाहत से यह बदलाव किया गया है। अभी और भी थानेदारों के विकेट गिर सकते है। अब आने वाले समय बताएगा कि क्या ये दरोगा राजनीतिक समीकरण में फिट बैठेंगे।
कानून व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने के लिए एसपी ने अपने प्रयोग अभी शुरू कर दिए है। इसी प्रयोग का नतीजा यह रहा है कि दो दिनों के भीतर 33 दरोगाओं के कार्यक्षेत्र में फेरबदल किया गया है। इसमें किसी की थानेदारी छिनी तो किसी को लाइन का सहारा मिला। वही कइयों को थाना की कमान सौंपी गई। मजे की बात यह है कि भारत नेपाल सीमा पर स्थित चौकियां जो, तस्करों के लिए मुफीद साबित हो रही थी, वहां फिर से केवल स्थानों के बदलाव किए गए है, लेकिन चौकी इंचार्जों को बार्डर छोड़ने नहीं दिया गया है। सूत्रों की माने तो इस फेरबदल में राजनीतिक लोगों को खुश करने की पूरी कोशिश की गई है। यही वजह है कि कई थानाध्यक्षों को फिर से थानेदारी की कमान सौंप दी गई है। कुछ थानेदार ऐसे भी है, जिनके नाम कोई गुडवर्क नहीं है, उन्हें भी थाने की कमान मिली है। यही वजह है कि इस फेरबदल के पहले दिन ही पुलिस महकमे में तरह तरह की चर्चाएं होने लगी थी। दूसरे दिन फिर से हुए बड़े बदलाव ने एक बार फिर पुलिस कर्मियों और जिलेवासियों को चौंका कर रख दिया है। फिलहाल राजनीतिक ढांचे में ये दरोगा कितने फिट होते है यह आने वाले समय की बताएगा। सूत्रों की माने तो विधानसभा अध्यक्ष के क्षेत्र इटवा सर्किल में हुए बदलाव की चर्चाए सबसे तेज हैं।