डुमरियागंज। भारतभारी में 101 तालाबों का रहस्य अब भी बरकरार है। इतिहास की खोज के लिए आने वाली टीमें हमेशा गंाव के टीले और मानसरोवर के इर्द-गिर्द जांच कर लौट जाती थीं। इनमें से किसी का ध्यान इन तालाबों की तरफ नहीं गया। गोरखपुर के पुरातत्व विभाग के पूर्व संग्रहालय अध्यक्ष से जब बात की गई तो उनके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा।
सिद्धार्थनगर जिले में डुमरियागंज तहसील को पर्यटन के मानचित्र पर जगह दिलाने वाले पौराणिक स्थल भारतभारी में पुरातत्वविदों के लिए एक और शोध का विषय मिल गया है। छह हजार बीघे में बसे इस गांव में थोड़ी-थोड़ी दूरी पर छोटे-बड़े मिलाकर कुल 101 तालाब हैं। इन तालाबों के अस्तित्व में आने का समय किसी भी गांव के नागरिक को याद नहीं है। इतनी बड़ी संख्या में तालाब गांव के लिए पहेली बनी हुई है। इनका इस्तेमाल लोग खेतों की सिंचाई और पशुओं को नहलाने आदि में करते हैं। गंाव के पूर्व प्रधान रमजान अली (80) ने बताया कि वह इन तालाबों को बचपन से ही देखते आ रहे हैं। लैश मुहम्मद ने बताया उनके पूर्वजों को भी इस बारे में कोई विशेष जानकारी नहीं थी। शेरबहादुर सिंह (75) ने कहा कि गंाव में तालाबों की संख्या ज्यादा है। इनका वजूद जरूर किसी न किसी इतिहास से जुड़ा होगा। सिंह ने बताया कि इन तालाबों का रहस्य टीले से जुड़ा हो सकता है। गंाव के राजकुमार, राजेश सिंह ने बताया कि प्रचलित कथाओं के मुताबिक इन तालाबों की खुदाई टीले के नीचे मिली प्राचीन दीवारों के निर्माण की ईंट बनाने के लिए हुई हो।
व्यापारिक नगरी का दे रहे प्रमाण
डुमरियागंज। गोरखपुर के पुरातत्व विभाग के पूर्व संग्रहालय अध्यक्ष और पुरातत्वविद् डॉ. कृष्णानंद त्रिपाठी ने बताया कि भारतभारी गंाव कपिलवस्तु के नजदीक है। इसकारण इतने ढेर सारे तालाबों का रहस्य बौद्धकालीन सभ्यता से भी जुड़ा हो सकता है। यह भी कहा कि भारतभारी उस समय व्यापारिक उपनगरी रही होगी। जहां व्यापारियों ने स्नान और पशुओं के पीने के लिए पानी की व्यवस्था के लिए तालाबों का निर्माण करवाया हो।
गांव में 84 बीघे का है मानसरोवर
डुमरियागंज। भारतभारी गांव में स्थित 101 तालाबों में सबसे बड़ा तालाब शिव मंदिर के पास 84 बीघे में फैला पवित्र मानसरोवर है। इसके अलावा तकियवां 50 बीघा, तलवा, लमुईया, भजहिया, फरदिहवां, सौतिहवां, माईधेंवा, घेाड़रहिया, कपसहवा, चलगंहियवा, धोबघटवा, तिलेहवा, कु ड़नियां, फन्नेहा, हगनी, खुखुंडहिया, टेढ़ियवां, शेखडिहवा, कोड़निया बड़की, बनिहवा, चौधरनिया, चिकनी, धोबहिया, बिचली, सियरहिया, ककरहवा, फलवापुर, मुर्गहिया, मिरचकवा, लमुइया बड़की, बनकसिहवा, पेड़रहिया, गोनहा, सोनबरसहिया, बाबक गड़हिया, सेवड़हिया, बजरहिया, दुबरगड़हिया, चिगनबड़की आदि हैं।
आधुनिकता की भेंट चढ़ रहे तालाब
डुमरियागंज। आधुनिकता दौड़ में इन तालाबों का वजूद खत्म हो रहा है। पचास तथा अस्सी के दशक में हुई चकबंदी में कुछ तालाब तहसील प्रशासन की अनदेखी से चकबंदी की भेंट चढ़ गए। सिंचाई के लिए पंपसेट के इस्तेमाल ने इन तालाबाें की उपयोगिता भी काफी कम कर दी है। पशुपालकों की घटती संख्या भी तालाब के रख-रखाव पर असर डाल रही है। इतना ही नहीं तहसील प्रशासन के ढुलमुल रवैये के कारण तालाबों पर अतिक्रमण भी इनका वजूद मिटा रहा है।
एसडीएम ने कहा
डुमरियागंज एसडीएम शिवरतन लाल वर्मा ने कहा गंाव में इतनी बड़ी संख्या में तालाब होने की जानकारी उन्हें नहीं है। वे तहसील स्तर से इन तालाबों का पता करवाकर उन पर हुए अतिक्रमण को हटवाएंगे। भारतभारी गंाव पर्यटन स्थल है। यहां तालाबों की बड़ी संख्या भी कहीं न कहीं इतिहास से जुड़े होने की संभावना प्रकट करती है। इन तालाबों के संरक्षण का उपाय भी करवाया जाएगा।