बांसी। ‘चार साल बाद ही सही अब कलेजे को ठंडक पहुंची है। बेकसूर बेटे के हत्यारे को सजा मिलने की सूचना से खुशी मिली है। हमें न्याय मिल गया और बेटे की आत्मा को शांति।’
यह कहना है बांसी कोतवाली क्षेत्र के गांव डफलपुरवा जनियाजोत की खुशलैन का। 32 साल के बेटे मो. उमर को गंवाने वाली खुशलैन को जब ‘अमर उजाला’ से अजमल कसाब को फांसी दिए जाने की सूचना मिली तो उनके चेहरे पर चमक आ गई। बगल में बैठे उमर के पिता अब्दुल खालिद ने अल्लाह का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा कि आज इंसाफ का दिन है। कसाब को गिरफ्तार करने के दिन ही फांसी दे दी जानी चाहिए थी। खालिद बताते हैं कि मुंबई में 26 नवंबर 2008 को आतंकी हमले के दौरान उमर वहां था। वह बिलेपार्ले एक टैक्सी से जा रहा था। टैक्सी में विस्फोट में उसकी मौत हो गई थी। उमर के छोटे भाई मो. नसीम उमर की सास अकीलुमुन्निशा ने कहा कि बेटी की मांग उजाड़ने वाले को सजा सुकून देने वाली खबर है।
छोटे भाई मो. नसीम ने कहा कि कसाब को सार्वजनिक रूप से फांसी दी गई होती तो और खुशी होती। गांव के युवक सरफुद्दीन पुत्र अब्दुल मजीद का कहना है कि यह सरप्राइज है। हमें लग रहा था कि कसाब को फांसी का निर्णय राजनीति में उलझकर रह जाएगा। कसाब को फांसी से गांव में खुशी का माहौल है।
बच्चों के साथ मुंबई में है पत्नी
मो. उमर की पत्नी मोमिना खातून अपने चारों बच्चों के साथ मुंबई के गोवंडी में रहकर जीविकोपार्जन कर रही है। मो. उमर का बड़ा बेटा अरबाज दस साल, फैसल सात साल और मो. अफजल चार साल का है। उमर की पत्नी और बच्चे परिवार में शादी या अन्य कोई काम पड़ने पर गांव आते हैं।