सिद्धार्थनगर। लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा के संभावित गठजोड़ को देखते हुए भाजपा अब नए सिरे से रणनीति बनाने में जुट गई है। विपक्षी दलों के वोट बैंक में सेंधमारी के लिए कार्यकर्ताओं को दलित बस्तियों में जाने का निर्देश दिया गया है। प्रत्येक बूथ स्तर पर कार्यक्रम कर केंद्र व प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों से अवगत कराते हुए दलित वर्ग को पार्टी से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा। इसी क्रम में 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती पर भाजपा दलित बस्तियों में सहभोज भी आयोजित करेगी।
गोरखपुर और फुलपुर के उपचुनाव में सपा-बसपा के गठजोड़ के नतीजों ने भाजपा के सामने नई चुनौती खड़ा कर दी है। इसे देखते हुए आगामी लोकसभा चुनाव से पूर्व पार्टी इस चुनौती से निपटने के लिए हरसंभव कोशिश में जुट गई है। फिलहाल उसकी पहली कोशिश बसपा के दलित वोटों में सेंधमारी की है। अमूमन हर विधानसभा क्षेत्र में बड़ी संख्या में मौजूद दलित वोटों को साथ लाकर भाजपा अपने जीत की बुनियाद तय करने में जुट गई है। इसके लिए सभी मंडल, सेक्टर व बूथ अध्यक्षों को अपने क्षेत्र की दलित बस्तियों में जाने का निर्देश दिया गया है। शुक्रवार को हुई सांगठनिक बैठक में भी प्रदेश उपाध्यक्ष अक्षयबर नाथ गौड़ का इस पर विशेष जोर रहा। 20-30 मार्च तक सेक्टरों में प्रवास करने को कहा गया तो इसके साथ ही दलित बस्तियों में जाकर व्यापक अभियान जोड़ने का निर्देश दिया।
पार्टी पदाधिकारियों की मानें तो पार्टी नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि सपा-बसपा के गठजोड़ के रंग दिखाने से पहले ही दलित वोट बैंक में मजबूत सेंधमारी कर ली जाए। इसके लिए 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती पर दलित बस्तियों में ही सहभोज के लिए भी निर्देशित किया गया है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अगर भाजपा की यह रणनीति कारगर रही तो परिणाम काफी अनुकूल रहेंगे। यहां यादव वर्ग का रुझान पहले से भाजपा में रहा है। पूर्व मंत्री धनराज यादव, रामरेखा यादव भाजपा से ही वर्षों तक विधायक रहे। दलित वोटरों के साथ आना फायदेमंद होगा।