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35 साल बाद दहशत से फिर थर्राए लोग

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डुमरियागंज (सिद्धार्थनगर)। राप्ती के रौद्र रूप से डुमरियागंज कस्बे पर खतरे की घंटी बजने लगी है। कस्बे को बचाने के लिए बने बांध के लेबल तक पवनी पहंचने के साथ बांध में कई जगह रिसाव भी होने लगा है। जलस्तर इस स्तर तक पहुंच गया है कि वह नदी पर बने पुल की छत को छूने को बेताब है। पुल से भारी वाहनों का आवागमन एहतियातन रोक दिया गया है। हालात की गंभीरता को देखते हुए विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह ने शनिवार की शाम को अधिकारियों के साथ आपात बैठक की। अलग-अलग क्षेत्रों की मॉनीटरिंग के लिए टीम बनाकर अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई। वहीं नगर पंचायत सभागार में इमरजेंसी कंट्रोल रूम बनाकर उसकी जिम्मेदारी ईओ को सौंपी गई। ऐसी ही स्थिति 1982 में हो गई थी, उस समय भी नदी का पानी बांध के लेबल तक पहुंच गया था।
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विधायक ने कहा कि बाढ़ के हालात से निपटने के लिए सभी को पूरी जिम्मेदारी से काम करने की जरूरत है। बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए समाज के हर तबके को आगे आना चाहिए। शासन-प्रशासन हर मदद के लिए तैयार है। एसडीएम राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि बाढ़ से निपटने के लिए तहसील क्षेत्र के सभी अधिकारियों को अलर्ट कर दिया गया है। अलग-अलग क्षेत्रों की निगरानी और वहां के लोगों की सुरक्षा व राहत कार्य के लिए टीम बनाई गई है। डुमरियागंज से सटकर बहने वाली राप्ती नदी से नगर को बचाने के लिए बनाए गए बांध के लेवल पर पानी पहुंच गया है। जिस पर पूरी निगाह रखी जा रही है। जहां भी बांध में रेट होल या रिसाव की जानकारी मिल रही है। वहां सिचाई विभाग के लोग ठोकर की व्यवस्था कर रहे हैं। बाढ़ की जानकारी और हालात पर नजर रखने के लिए नगर पंचायत सभागार में इमरजेेसी कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। बैठक में सीओ डुमरियागंज सुनील सिंह, चंदन कुमार, हरिशंकर चौधरी, राजेश गुप्ता, लाले, एचएन ओझा, उमेश पांडेय, चंद्रभान अग्रहरि, दिनेश सिंह के अलावा अन्य अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।
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