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अधर में अटका बैंकों का कर्ज

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सिद्धार्थनगर। शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द होने के बाद बैकों का करोड़ों रुपये अधर में फंस गया है। मूल वेतन पर लोन पास करने के बाद यह स्थिति आई है। सर्वाधिक लोन पूर्वांचल बैंक, एसबीआई, पीएनबी के अलावा प्राइवेट बैंकों ने दिया है। करीब 1 हजार 700 समायोजित शिक्षकों ने शिक्षा, घर व वाहन के लिए लोन लिया है। वहीं, विभागीय कर्मचारियों ने भी कार्रवाई शुरू कर दिया है। विभागीय सॉफ्टवेयर से समायोजित शिक्षामित्रों के नाम की छटंनी शुरू कर दी गई है।
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विभागीय सूत्रों के अनुसार प्राथमिक शिक्षा विभाग में कुल 8 हजार 751 शिक्षकों का वेतन निर्गत होता है। इसमें 2 हजार 218 समायोजित शिक्षामित्र शामिल हैं। शासन के निर्देश पर हुए समायोजन के बाद शिक्षामित्रों के मूल वेतन में खासी बढ़ोतरी हुई। आपसी प्रतिस्पर्धा के चलते बैंक की शाखाओं में शिक्षकों का खाता खुलवाने की होड़ मच गई। समायोजित शिक्षकों के सर्वाधिक खाता पूर्वांचल बैंक में खोले गए। इसके बाद एसबीआई व पीएनबी की शाखाओं में भी खाता खोले गए। इनमें से करीब 600 समायोजित शिक्षकों ने प्राइवेट बैंकों में वेतन का खाता खुलवाया। सूत्र बताते हैं कि शिक्षकों ने मूल वेतन पर करीब 30 करोड़ रुपये बच्चों की उच्च शिक्षा, मकान निर्माण व वाहनों पर लोन लिया है। इस संबंध में कोषाधिकारी प्राथमिक शिक्षा विभाग अजय शाही ने कहा कि जिले में कुल 2218 समायोजित शिक्षकों का वेतन निर्गत होता था। इसमें से करीब 1 हजार 800 ने विभाग से वेतन प्रमाण पत्र जारी कराया था। अधिकांश ने बैंकों से वेतन पर लोन पास कराया है। लोन की रिकवरी कैसे की जाएगी, यह बैंक की जिम्मेदारी है। कोषाधिकारी अनुराग श्रीवास्तव ने बताया कि शासन के निर्देश पर समायोजित शिक्षकों की छंटनी शुरू हो गई है। समायोजन की प्रक्रिया के बाद कुल 8 हजार 751 शिक्षक व समायोजित शिक्षकों का नाम विभागीय सॉफ्टवेयर में दर्ज किया गया था। समायोजन रद्द होने के बाद 2 हजार 218 समायोजित शिक्षकों का नाम सॉफ्टवेयर से हटाया जाएगा।
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