इटवा (सिद्धार्थनगर)। त्रिलोकपुर क्षेत्र के त्रिलोकपुर गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय की खिड़की में सोमवार को करंट उतर आया। तीन छात्र इसकी चपेट में आ गए। तीनों का उपचार एक निजी अस्पताल में चल रहा है। बताया जा रहा है कि बिजली का तार कई जगह पर कटा था, जिससे खिड़की में लगी लोहे की सरिया में करंट उतर गया।
क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय व पूर्व माध्यमिक विद्यालय त्रिलोकपुर आसपास स्थित है। सोमवार सुबह 9. 30 बजे प्राथमिक विद्यालय के बच्चे स्कूल में खेल रहे थे। विद्युत आपूर्ति जंगले के रास्ते केबिल से की गई थी। केबिल के क्षतिग्रस्त होने के कारण बिजली खिड़की में लगी छड़ों में भी प्रवाहित हो रही थी। इसी दौरान खेलते-खेलते आयुषी (पुत्री होरीलाल), आदित्य (पुत्र नेबूलाल), विवेक (पुत्र बब्बू) का हाथ छड़ पर पड़ने से करेंट की चपेट में आ गए। इस बात की जानकारी होते ही स्कूल में कार्यरत रसोइया ने सूखी लकड़ी के सहारे बच्चों को करेंट से छुड़ाया। हालांकि तब तक तीनों बच्चे काफी झटका खा चुके थे गए। आसपास के लोगों की मदद से उन्हें तत्काल निजी चिकित्सक के यहां ले जाया गया, जहां आयुषि व आदित्य को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया, जबकि विवेक का अभी उपचार चल रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक अब वह खतरे से बाहर हैं। तीनों बच्चों की उम्र आठ से 10 वर्ष के बीच बताई जा रही है। खंड शिक्षा अधिकारी भनवापुर चंद्रभूषण ने बताया कि मामले की जानकारी नहीं है। अगर ऐसा है तो जांच कर तार को तत्काल बदलवा दिया जाएगा।
सुरक्षा के उपायों व लापरवाही की खुली पोल
इटवा। प्राथमकि विद्यालय त्रिलोकपुर में बच्चों को करंट लगने की घटना कई सवाल खड़े करती है। रसोइया की हिम्मत व सूझबूझ के चलते कोई बड़ा हादसा तो नहीं हुआ, लेकिन विद्यालय में सुरक्षा के उपायों की पोल जरूर खुल गई। बरसात के समय में बिजली के तारों को लेकर आमतौर सावधानी बरती जाती है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि लोहे की सरिया लगे जंगले से बिजली का केबिल क्यों ले जाया गया था। जबकि ऐसी दशा में करंट उतरने की आशंका बनी रहती है। वहीं दूसरी ओर हादसा सुबह करीब साढ़े नौ बजे के आसपास बताया जा रहा है। उस दौरान प्रधानाचार्य व शिक्षक विद्यालय में क्यों नहीं मौजूद थे, जबकि स्कूल खुलने का समय सुबह आठ बजे ही है।