सिद्धार्थनगर। भनवापुर ब्लॉक प्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को लेकर जिला मुख्यालय पर गुरुवार को जमकर सियासी ड्रामा हुआ। सत्ताधारी भाजपा दो खेमों में बंट गई। दोनों ही गुटों से प्रभावशाली नेताओं के बीडीसी सदस्यों का अलग-अलग समूह लेकर पहुंचने से प्रशासन की भी नींद उड़ गई। 106 सदस्यों वाले इस क्षेत्र पंचायत में दोनों ओर से कुल 160 शपथ पत्र सौंपे गए।
जबकि 110 की परेड कराई गई। एक गुट ने कलेक्ट्रेट में डीएम को पत्र सौंपा तो दूसरे गुट की ओर से विकास भवन सभागार में सदस्यों का सत्यापन कराया गया। सदस्यों के इस आंकड़े को लेकर प्रशासन भी उलझ गया है। डीएम ने शपथ पत्रों के सत्यापन के बाद तिथि निर्धारित करने की बात कही है। दोनों खेमों की मौजूदगी के चलते टकराव की आशंका में कलेक्ट्रेट छावनी बना रहा।
भनवापुर ब्लॉक प्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की उलझन, सुलझाने में प्रशासन को पसीना आ गया। एक गुट की अगुवाई कर रहे पूर्व विधायक प्रेम प्रकाश उर्फ जिप्पी तिवारी बीडीसी सदस्यों के साथ कलेक्ट्रेट परिसर में दोपहर 12 बजे पहुंचे। कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में उन्होंने ब्लॉक प्रमुख के खिलाफ अविश्वास के लिए 84 सदस्यों का शपथ पत्र डीएम कुणाल सिल्कू को सौंपा। मौके पर 56 बीडीसी सदस्यों की मौजूदगी रही, जिनका डीएम ने बारी-बारी से परीक्षण कराया। वहीं दूसरे गुट की अगुवाई कर रहे लवकुश ओझा ने विकास भवन सभागार में अविश्वास प्रस्ताव के लिए 76 बीडीसी सदस्यों का शपथ पत्र सौंपा। सीडीओ अनिल कुमार मिश्रा व डीपीआरओ अनिल कुमार सिंह की मौजूदगी में कुल 54 बीडीसी सदस्यों ने पेश होकर ब्लॉक प्रमुख के विरोध में अविश्वास जताया। इस बीच कलेक्ट्रेट सभाकक्ष से एक गुट से शपथ पत्र लेने के बाद डीएम कुणाल सिल्कू विकास भवन पहुंचे और वहां दूसरे गुट के अविश्वास प्रस्ताव की भी प्रक्रिया पूर्ण कराई। इस दौरान राजू पाल, अमित पांडेय, ज्वाला चौधरी, लालजी शुक्ला, धीरेंद्र प्रताप सिंह, अनिल सोनी, नरेंद्र श्रीवास्तव, श्याम सुंदर अग्रहरि, नृपेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।
106 सदस्यों के सदन में पेश हुए 160 शपथ पत्र
सिद्धार्थनगर। सपा जिलाध्यक्ष अजय चौधरी की भयोहू रीना चौधरी को अपदस्थ करने की तैयारी में जुटी भाजपा खुद आपस में उलझ गई है। बीडीसी सदस्यों ने ऐसा खेल खेला है कि सियासी रणनीतिकार भी पशोपेश में पड़ गए हैं। चौंकाने वाली बात है कि 106 सदस्यों वाले इस क्षेत्र पंचायत में कुल 160 शपथ पत्र सौंपे गए। जाहिर सी बात है कि कई सदस्य ऐसे हैं, जिन्होंने दोनों तरफ से शपथ पत्र दिया है। एक खेमे के साथ विश्वासघात कर दूसरे में शामिल होने वाले सदस्यों की पहचान भावी ब्लॉक प्रमुख बनने का सपना संजोए दावेदारों के लिए चुनौती बन गई है। भनवापुर ब्लॉक प्रमुख का पद महिला वर्ग के लिए आरक्षित है। यहां से पूर्व विधायक जिप्पी तिवारी अपनी पत्नी संध्या तिवारी को प्रमुख बनाने को उतावले हैं तो दूसरी ओर हियुवा के प्रदेश प्रभारी व डुमरियागंज विधायक राघवेंद्र सिंह के बेहद करीबी कहे जाने वाले लवकुश ओझा की पत्नी शशिकला की दावेदारी मानी जा रही है। दोनों ही सत्ताधारी दल से जुड़े हैं। यही कारण भी रहा कि यहां अविश्वास की प्रक्रिया शुरू करने में काफी वक्त लग गया। सूत्रों की मानें तो पार्टी नेता दोनों ही खेमों से संपर्क कर किसी एक को मनाने में लगे रहे, लेकिन हर कोशिश नाकाम रही है। नतीजा दोनों ही गुट एक-दूसरे के विरोध में अलग-अलग समूह के साथ अविश्वास कराने डीएम के समक्ष हाजिर हो गए। दोनों ही पक्ष अपने साथ अधिक संख्या का दावा करते रहे, लेकिन उनकी ओर से पेश शपथ पत्रों पर गौर करें तो आंकड़ा 160 तक पहुंच जाता है, जबकि यहां सदस्य महज 106 ही हैं। परेड करने वालों की संख्या भी 110 हो रही है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि अधिकारियों के सामने पेश होने वाले सदस्यों की संख्या कैसे ज्यादा हो गई। कहीं न कहीं अपनी ताकत दिखाने के लिए कुछ ऐसे लोगों को पेश किया गया जो बीडीसी सदस्य थे ही नहीं।
दोनों पक्ष ने खुद को बताया सही
सिद्धार्थनगर। अविश्वास प्रस्ताव को लेकर प्रशासन के रुख पर पूर्व विधायक प्रेम प्रकाश उर्फ जिप्पी तिवारी ने सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि संध्या तिवारी की अगुवाई में 84 बीडीसी सदस्यों ने शपथ पत्र दिया और 56 ने उपस्थित रहकर प्रमुख के खिलाफ अविश्वास जताया। इस हिसाब से अविश्वास प्रस्ताव लाने की प्रक्रिया पूरी हो गई थी। ऐसे में प्रशासन को दोबारा अविश्वास प्रस्ताव लेने की क्या जरूरत थी। वहीं लवकुश ओझा ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव के लिए चार दिन पहले डीएम ने उन्हें आज का समय दिया था। दूसरा गुट टकराव करने पर आमादा था। रास्ते में आते समय भी बीडीसी सदस्यों को धमकाया गया। पार्टी के कार्यकर्ता व लोग भी उनके साथ हैं।