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कोरोना संक्रमण काल में गटक गए करोड़ों की शराब

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कोरोना संक्रमण काल में गटक गए करोड़ों की शराब
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पिछले वर्ष की तुलना में सात करोड़ अधिक हुआ राजस्व विभाग को आय
पिछले वर्ष 145 करोड़ राजस्व की हुई थी वूसली
इस बार 152 करोड़ पर पहुंचा राजस्व
संक्रमण के चलते एक माह दो दिन बंद रही दुकान
अंग्रेजी, बियर कम, देसी की हुई अधिक बिक्री
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। कोरोना संकट का असर शराब के शौकीनों पर नहीं रहा। आंकड़े बताते हैं कि कोरोना काल में बीते वर्ष के मुकाबले सात करोड़ रुपये अधिक की शराब पी गई। रोचक यह है कि कोरोना काल में शराब की दुकानें 33 दिन बंद रहीं, उसके बावजूद शराब पीने वालों ने सात करोड़ रुपये अतिरिक्त राजस्व के रूप में चुकाए। वित्त वर्ष 2019-20 में इस मद में 145 करोड़ रुपये राजस्व खाते में गए थे। वर्ष 2020-21 में बढ़कर 152 करोड़ रुपये पहुंच गया जबकि अभी वित्त वर्ष समाप्त होने में करीब ढाई माह शेष हैं।
कोरोना संक्रमण काल में देश की अर्थव्यवस्था को भी बड़ी चोट पहुंची। संकट का असर ऐसा रहा है कि हर कोई परेशान है। बावजूद इसके शराब के शौकीनों पर इसका असर नहीं नजर आया। लग्न माह में शराब की बिक्री अधिक होती है। हर ब्रांड की शराब अन्य दिनों की तुलना में अधिक बिकती है मगर कोरोना के संक्रमण को देखते हुए एक अप्रैल से तीन मई तक शराब की दुकानों को बंद कर दिया। इसके बाद शराब की दुकानें खुलीं। मगर बिक्री का जो आंकड़ा सामने आया है, उससे यह स्पष्ट है कि शराब के शौकीनों पर कोरोना का कोई असर नहीं रहा है। कारण जहां लोग रोजगार गवांने के बाद आर्थिक संकट खड़ा हो गया। वहीं, शराब की बिक्री जो की उम्मीद नहीं थी। पिछले साल के तुलना में चार प्रतिशत अधिक राजस्व की प्राप्ति हुई। 145 करोड़ रुपये पिछले वर्ष राजस्व प्राप्ति हुई थी। जो इस बार सात करोड़ रुपये बढ़ गया। यानी कुल 152 करोड़ रुपये राजस्व की प्राप्ति हुई। जिला आबकारी अधिकारी रविंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष शराब की बिक्री में सात करोड़ रुपये अधिक राजस्व की प्राप्ति हुई है। विभाग के मुताबिक कोरोना संकट शुरू होने के बाद से कोरोना टैक्स भी लगा। इसमें देसी शराब को छोड़कर अंग्रेजी और बियर के विभिन्न ब्रांड की शराब पर 20 से 400 रुपये तक कोरोना टैक्स लगा रहा है।
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देसी शराब की अधिक रही मांग
कोरोना संक्रमण शुरू होने के बाद बियर और अंग्रेजी शराब के सेवन करने से लोग डरने लगे। उनकी सोच थी कि बियर ठंडी होती है और कोरोना सर्दी जुकाम के साथ पकड़ रहा है। इस वजह से इन ब्रांडों की शराब का सेवन कम हुआ। मगर देसी शराब अपने शबाब पर रहा। लोगों ने देसी शराब भी जमकर पी।
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आठ माह में पी गए इतने शराब
कोरोना संक्रमण शुरू होने के बाद अप्रैल में तीन मई तक शराब की दुकान को बंद कर दिया गया था। मई में शराब की दुकानें खुलीं। मई से दिसबंर माह के बीच यानी आठ माह में 67,527.4 बल्क लीटर देसी शराब। 7,61,870 बोतल अंग्रेजी शराब। 22,28,091 शीशी केन। 4,86,1853 पौवा देसी शराब की बिक्री हुई है।
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